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जलसंकट की आहट : तालाब सूखते जा रहे अभी से ही चापाकलों से नहीं आ रहा पानी।

जिले में मार्च महीने में ही भीषण गर्मी ने लोगों को परेशान कर दिया है। पिछले एक सप्ताह से तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गया। रविवार को अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शहरी क्षेत्र के अलावे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी चापाकल से पानी देना छोड़ दिया है। जिस वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई ऐसे तालाब हैं जहां पानी काफी कम हो गया है या कह लें कि ना के बराबर बचा है। इसकी सबसे बड़ी वजह जिले में बारिश नहीं होना है। अक्टूबर माह के बाद जिले में बारिश नहीं हुई है।

एकाध दिन नाम के लिए बारिश हुई जिससे कि ठीक से सड़क भी नहीं भिंगा। साथ ही सरकार व जिला प्रशासन के द्वारा बार-बार आम लोगों के द्वारा जल संचय को लेकर गंभीर नहीं होना कहीं ना कहीं इसकी कीमत आमलोगों को ही चुकानी पड़ेगी। 85 वर्षीय बम मिश्र ने बताया कि 1998 के बाद पहली बार मार्च में इतनी गर्मी देखी जा रही है। 75 वर्षीय नरेश मिश्र ने भी कहा कि मार्च में पहले हल्की ठंड रहती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। सौराठ उतरवारी टोल के कई परिवार गर्मी से परेशान होकर दिनभर तालाब किनारे पेड़ की छांव में समय बिता रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि पेड़ों का अंधाधुंध कटाई व जलस्रोत का भरना भी गर्मी व वाटर लेवल कम होने का प्रमुख कारण है।

धूप और गर्मी के कारण हीटस्ट्रोक के मरीजों की संभावना बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। सभी सरकारी अस्पतालों को जरूरी दवाएं और हीट वेव से प्रभावित मरीजों के इलाज की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए डेडिकेटेड बेड की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। जहां ओआरएस कॉर्नर नहीं हैं, वहां इसे स्थापित किया जाएगा।

जहां हैं, उन्हें मजबूत किया जाएगा। गर्म हवा और लू का शरीर पर बुरा असर पड़ता है। यह कभी-कभी जानलेवा भी हो सकता है। थोड़ी सावधानी और दिशा-निर्देशों का पालन कर इससे बचा जा सकता है। साथ ही बच्चों में चमकी, चिकन पॉक्स, मिजिल्स की भी समस्या भी मार्च से लेकर जून तक बढ़ जाता है। इसलिए विभाग की ओर बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने का निर्देश जारी किया गया है।

किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। किसान फुदन राय, मदन कामत, सगुन राय और बैद्यनाथी राय ने बताया कि अगर यही हाल रहा तो रबी और तिलहन की तरह मूंग की फसल भी प्रभावित होगी। तेज गर्मी का असर पूरी तरह पैदावार पर पड़ेगा। साथ ही जमीन के बंजर होने का भी डर किसानों को सता रहा है। वहीं, नदी और तालाब के सूखते जाने से आगे पटवन में भी बड़ी समस्या हो सकती है। जलसंचयन को लेकर कोई सार्थक प्रयास नहीं हो रहा है और हर स्तर पर बड़ी लापरवाही देखी जा रही है। इसका भीषण परिणाम अब लोगों के सामने आ रहा है।

 

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