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बद्री पूर्वे ने धोखा देने का लगाया आरोप, दरभंगा शहरी सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे।

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बद्री पूर्वे ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी पर धोखा देने का आरोप लगाया है। दरभंगा शहर से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि मेरी उम्मीदवारी पहले से तय थी, लेकिन अंतिम क्षणों में टिकट छीनकर उमेश साहनी को दे दिया। तेजस्वी यादव ने भी मेरे नाम का समर्थन किया था, फिर भी पार्टी ने मेरे साथ धोखा किया है। आगे की रणनीति पर विचार करेंगे। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर हमेशा ईमानदारी से कार्यकर्ता और पदाधिकारियों का साथ देते रहे हैं।

संगठन को जोड़े रखा और दरभंगा शहर से जीतने की पूरी तैयारी कर रहे थे। पार्टी की भीतरी साजिशों और मुकेश साहनी के व्यक्तिगत हस्तक्षेप के कारण उनकी उम्मीदवारी को अंतिम समय में छीन लिया गया। हमने जनता के बीच काम किया। लोगों का विश्वास था।

मुझे बेइज्जत किया गया

पूर्वे ने आगे कहा कि मुझे और मेरे समर्थकों को पद देने का वादा भी किया गया था, लेकिन हुआ कुछ नहीं। अब पार्टी का सहयोग नहीं करेंगे। जो हुआ उसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ेगा। अगर मुझे पहले बताया गया होता कि टिकट नहीं मिलेगा तो मैं रास्ता बदल लेता। मुझे गुमराह किया गया और बेइज्जत किया गया।

दरभंगा शहर में बद्री पूर्वे की स्थानीय पकड़ और सामाजिक समूहों में प्रभाव को ध्यान में रखें तो उनका इस्तीफा वीआईपी के लिए चिंता बढ़ाने वाला कदम है। यदि पूर्वे अपने समर्थकों के साथ किसी दूसरे दल में शामिल हो जाते हैं या निर्दलीय रूप से मैदान में उतरते हैं, तो दरभंगा शहरी सीट का समीकरण बदल सकता है।

पूर्वे पहले से ही महागठबंधन से निकटता का संकेत दे चुके हैं। उन्होंने कहा है कि वे महागठबंधन के किसी दल में भी जा सकते हैं। जिससे गठबंधन के भीतर सीटों के समीकरण पर असर पड़ने की संभावना है।

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