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सहरसा : बिहार में बाढ़ ने दिखाया खौफनाक मंजर, उजड़ गया आशियाना, तबाह हुआ जीवन

सहरसा:- कोसी में बाढ़ की मार कई दशकों से लोग झेलते आ रहे हैं. कभी पानी का जलस्तर बढ़ने से लोगों की मुसीबतें बढ़ने लगती हैं, तो कभी पानी का जलस्तर घटने के बाद कटाव तेज हो जाता है. कटाव तेज होने से न केवल लोगों को परेशानी होती है, बल्कि उनका बना बनाया आशियाना भी नदी में समा जाता है. इस दरमियान बाढ़ पीड़ितों के बीच सबसे बड़ी मुसीबत रहने के साथ खाने-पीने की हो जाती है ।

दरअसल सहरसा जिले के नौहट्टा प्रखंड के कोसी तटबंध के भीतर बसे कई दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं. तस्वीर सहरसा जिले के नोहटा प्रखंड के केदली पंचायत की है. यह पंचायत पानी से घिरा हुआ है और चारों ओर पानी ही पानी नजर आता है.

दरअसल सहरसा जिले के नौहट्टा प्रखंड के कोसी तटबंध के भीतर बसे कई दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं. तस्वीर सहरसा जिले के नोहटा प्रखंड के केदली पंचायत की है. यह पंचायत पानी से घिरा हुआ है और चारों ओर पानी ही पानी नजर आता है.

उफलते पानी का वह खौफनाक आवाज सुन हर कोई डर जाता है, मानो अपनी जान हथेली पर रखकर लोग इलाके में रह रहे हैं. नोहटा प्रखंड के कैदली पंचायत के रामपुर इलाके की काफी बदहाल स्थिति है.

उफलते पानी का वह खौफनाक आवाज सुन हर कोई डर जाता है, मानो अपनी जान हथेली पर रखकर लोग इलाके में रह रहे हैं. नोहटा प्रखंड के कैदली पंचायत के रामपुर इलाके की काफी बदहाल स्थिति है.

स्थानीय निवासी गांगी यादव ने रो-रोकर अपना दर्द बयां किया और सरकार से गुहार लगाई. उनके ये आंसू इस बात का गवाह हैं कि उनका दर्द कम नहीं है. वे बताते हैं कि 3 दिन से कुछ खाया नहीं है. खाने को अनाज नहीं है और चारों और पानी ही पानी है.

स्थानीय निवासी गांगी यादव ने रो-रोकर अपना दर्द बयां किया और सरकार से गुहार लगाई. उनके ये आंसू इस बात का गवाह हैं कि उनका दर्द कम नहीं है. वे बताते हैं कि 3 दिन से कुछ खाया नहीं है. खाने को अनाज नहीं है और चारों और पानी ही पानी है.

हर दिन कटाव तेज होता जा रहा है, जिस वजह से बना बनाया आशियाना उजाड़कर ऊंचे स्थान पर जा रहे हैं. सरकार की तरफ से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है और ना ही सुध लेने वाला कोई है. अभी तक राहत सामग्री भी नहीं दिया गया है. अधिकारी देखने तक नहीं आ रहे.

हर दिन कटाव तेज होता जा रहा है, जिस वजह से बना बनाया आशियाना उजाड़कर ऊंचे स्थान पर जा रहे हैं. सरकार की तरफ से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है और ना ही सुध लेने वाला कोई है. अभी तक राहत सामग्री भी नहीं दिया गया है. अधिकारी देखने तक नहीं आ रहे.

आखिर शिकायत करें तो करें किससे, सुनाने वाला कोई नहीं है और पूरा परिवार भूखा है, लेकिन भोजन देने वाला कोई नहीं है. बाजार जाए भी तो जाए कैसे, चारों तरफ पानी ही पानी है. सरकारी नाव की भी व्यवस्था प्रशासन द्वारा नहीं की गई है. धरातल पर सरकार की कोई व्यवस्था नहीं दिख रही है.
आखिर शिकायत करें तो करें किससे, सुनाने वाला कोई नहीं है और पूरा परिवार भूखा है, लेकिन भोजन देने वाला कोई नहीं है. बाजार जाए भी तो जाए कैसे, चारों तरफ पानी ही पानी है. सरकारी नाव की भी व्यवस्था प्रशासन द्वारा नहीं की गई है. धरातल पर सरकार की कोई व्यवस्था नहीं दिख रही है.

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