Tuesday, April 28, 2026
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22 अप्रैल से शुरू हुए पांच दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन रविवार को हो गया। समापन सत्र का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर स्थित जुबली हॉल में हुआ

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बतौर मुख्य अतिथि प्रोफेसर इंदु ने भारतीय चिंतन की श्रेष्ठता एवं पाश्चात्य दर्शन से इसकी विभिन्नता को रेखांकित किया। चार पुरुषार्थ – धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष की व्याख्या करते हुए उन्होंने शुभ लाभ की संकल्पना के साथ व्यावसायिक चिंतन की वकालत की।

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प्रोफेसर दास ने अपने आशीर्वादात्मक उद्बोधन में शोधार्थी को सतत विकास की अवधारणा के साथ तारतम्य बिठाकर पर्यावरण हितैषी नवाचार करने पर बल दिया। उन्होंने बहुजन हिताय बहुजन सुखाय के मंत्र को आत्मसात करने की आवश्यकता जताई।

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बतौर अध्यक्ष कुलपति प्रोफेसर चौधरी ने भारतीय जीवन मूल्यों, शोध एवं प्रकाशन के प्रति उत्कंठा एवं लक्षित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु सदैव प्रयासरत रहने पर बल दिया। उनके अनुसार छात्र एवं शिक्षक दोनों को कार्य करना होगा। देश की बेहतरी एवं विकसित भारत के लक्ष्य प्राप्ति हेतु यह अति आवश्यक है।

सत्र के आरंभ में आगत अतिथियों का प्रतीक चिन्ह से स्वागत सम्मेलन के सचिव डॉक्टर राज कुमार शाह एवं स्वागत भाषण संरक्षक प्रोफेसर एच. के सिंह ने प्रस्तुत किया। सम्मेलन के प्रतिनिधि प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किये। प्रतिवेदको के प्रतिवेदन को डॉक्टर ललित शर्मा ने प्रस्तुत किया।

सत्र का समापन कुलपति के इसी तरह की अकादमिक गतिविधियों के आयोजन की निरंतरता के निर्देश के साथ हुआ।धन्यवाद ज्ञापन सम्मेलन के समन्वयक डॉक्टर दिवाकर झा ने किया, वहीं मंच संचालन डॉक्टर निर्मला कुशवाह ने किया।

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