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बिहार की तर्ज पर झारखंड में चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को प्रोन्नति देने की मांग, राज्य गठन के बाद से अटका है प्रमोशन।

महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि झारखंड गठन के बाद से किसी भी चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को प्रोन्नति नहीं दी गई है, जबकि केंद्र सरकार के फैसले के अनुसार अब चतुर्थवर्गीय कर्मचारी की नियुक्ति सरकारी कार्यालयों में नहीं होगी. ऐसे में जो भी कर्मचारी पूर्व से नियुक्त हैं उन्हें प्रोन्नति देकर तृतीय वर्ग की श्रेणी में लाने का निर्णय है.

जानकारी देते महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा. 

इस संबंध में सरकार से पिछले दिनों शिष्टमंडल के द्वारा मांग भी की गई थी, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है. हमें उम्मीद है कि सरकार सकारात्मक रूख अपनाते हुए 15 नवंबर राज्य स्थापना दिवस के मौके पर जरूर कोई फैसला लेगी.

झारखंड में करीब 30 हजार हैं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी

राज्य सरकार के कार्यालय में करीब 30,000 चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी हैं, जो सचिवालय से लेकर जिला एवं प्रखंड स्तर पर कार्यरत हैं. इन कर्मचारियों को तृतीय वर्ग में प्रोन्नति देकर समायोजित करना है. बिहार ने इस संबंध में बड़ी पहल करते हुए वहां के सभी चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी को तृतीय श्रेणी में समायोजित करते हुए कार्यालय एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट पद पर पदस्थापित किया गया है.

झारखंड में चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को पद प्रोन्नति देने के मामले में सरकार ने पहल तो की है, लेकिन नियमावली में विसंगति होने की वजह से अभी भी यह मामला लटका हुआ है. ऐसे में वैसे कर्मचारियों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जिनके असामयिक निधन की वजह से अनुकंपा आधारित नियुक्ति होनी है. जिसमें इंटर तक की अहर्ता आवश्यक किया गया है. ऐसे में कर्मचारी संगठन सभी विसंगतियों को दूर करते हुए तृतीय श्रेणी में प्रोन्नति करने का आग्रह किया है.

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