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बिहार अनुसचिवीय कर्मचारी संघ की हड़ताल 12वें दिन जारी।

बिहार अनुसचिवीय कर्मचारी संघ की 10 सूत्री मांगों को लेकर शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल बुधवार को 12वें दिन भी जारी रही। हड़ताल के कारण कलेक्ट्रेट, अनुमंडल, डीडीसी, एडीएम, प्रखंड व अंचल स्तर पर कार्य पूरी तरह प्रभावित है।

जाति आवासीय प्रमाण पत्र, दाखिल-खारिज, खतियान नकल समेत आम जनता से जुड़े कार्य ठप पड़े हैं। सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी असर पड़ रहा है।

धरनास्थल पर जुटे कर्मचारियों ने सरकार पर उनकी जायज मांगों की अनदेखी का आरोप लगाया। जिला सचिव संतोष कुमार रमन ने कहा कि हमारी 10 सूत्री मांगें कोई नई नहीं है। इनमें एलडीसी को 2800 ग्रेड पे, 50 लाख का दुर्घटना बीमा, आवास सुविधा, पेंशन समेत अन्य मांगें शामिल हैं। यह मांगें वर्षों से लंबित हैं, सरकार को इन्हें पूरा करना चाहिए। जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, धरना जारी रहेगा।

हड़ताल बढ़ने के लिए सरकार जिम्मेदार

संघ के नेता देवेंद्र कुमार ने कहा कि हड़ताल खिंचने के लिए सरकार जिम्मेदार है। हमारी मांगें संविधानिक अधिकार हैं, लेकिन सरकार कर्मचारियों के बजाय कार्यालयों में ताले जड़कर आम जनता को परेशान कर रही है। अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो जनता भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाएगी।

हड़ताल से प्रभावित आम नागरिकों ने अपनी समस्याएं भी साझा कीं। मधुबनी जिले के लोकही प्रखंड से आए कमल नारायण यादव ने बताया कि 5 घंटे का सफर तय कर प्रखंड कार्यालय पहुंचे, लेकिन ताला लटका मिला।

शिवजी साह ने कहा कि खतियान लेने के लिए नेपाल सीमा से आए थे, लेकिन काम नहीं हुआ। रामनाथ सिंह ने पोखरभिंडा गांव से आकर बताया कि नकल निकालने का कार्य ठप है। खर्च और समय दोनों बर्बाद हो रहा है। वहीं, विजयकांत भगत ने कहा कि महीनों से खतियान सुधार के लिए कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हड़ताल के कारण समाधान नहीं हो पा रहा।

धरना स्थल पर बैठे कर्मचारियों ने “इंकलाब जिंदाबाद” और “नीतीश कुमार मुर्दाबाद” के नारे भी लगाए।

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