धनेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक करने पहुंचे मंत्री जीवेश मिश्रा:दरभंगा के शिवालयों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़।
सावन की पहली सोमवारी पर दरभंगा के शिवालयों में सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। हर-हर महादेव और ओम नम: शिवाय के जयकारों से पूरा शहर और ग्रामीण इलाका गूंज उठा। लोग पूजा-पाठ कर जलाभिषेक कर रहे हैं। लहेरियासराय स्थित केएम टैंक धनेश्वरनाथ मंदिर में बिहार सरकार के नगर विकास मंत्री जीवेश कुमार ने भी जलाभिषेक किया। उन्होंने राज्य की शांति और उन्नति की कामना की।
बिहार सरकार के नगर विकास मंत्री जीवेश कुमार ने भी मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक किया। उन्होंने राज्य की शांति, उन्नति और लोगों की तरक्की की कामना की। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालु जुटने लगे थे। हर-हर महादेव के जयघोष के साथ भक्तों ने जल चढ़ाया। मंदिर में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। मंत्री ने कहा, पहली सोमवारी का दिन शिवभक्तों के लिए खास होता है। इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
कुशेश्वरनाथ महादेव का पूजा करने के लिए कतार में लगे लोग
कुशेश्वरस्थान स्थित बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर में सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालु कतार में लग गए। यहां मिथिला के बैद्यनाथ कहे जाने वाले बाबा के दर्शन के लिए दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगूसराय, सहरसा, खगड़िया, सीतामढ़ी के अलावा नेपाल और भूटान से भी श्रद्धालु पहुंचे।
कतार में लगे श्रद्धालुओं ने बताया कि वे सुबह 5 बजे से लाइन में हैं। कुछ का पूजा हो गया, लेकिन परिवार के अन्य सदस्य अब भी कतार में हैं। यहां लोग बाबा के दर्शन के बाद खाली हाथ नहीं लौटते। जो सच्चे मन से मांगते हैं, उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।
कुशेश्वरस्थान मंदिर में 300 पुरुष और महिला सुरक्षाकर्मी तैनात
मंदिर में सुरक्षा के लिए 250 से 300 महिला-पुरुष पुलिसकर्मी तैनात किए गए। 50 जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। स्थानीय दुकानदारों और प्रशासन ने मिलकर पूरी तैयारी की है।
कुशेश्वरस्थान की शिवनगरी सावन की पहली सोमवारी पर आस्था और भक्ति का केंद्र बन गई। देर रात 1 बजे से ही श्रद्धालु मंदिर की ओर बढ़ने लगे। हर तरफ हर-हर महादेव और जय बाबा कुशेश्वरनाथ के जयकारे गूंजने लगे।
श्रद्धालु पहले शिवगंगा घाट में स्नान कर खुद को शुद्ध कर रहे थे, फिर बेरीकेटिंग में कतारबद्ध होकर मंदिर की ओर बढ़ रहे थे।मंदिर का गर्भगृह सुबह 3:30 बजे खोला गया। इससे पहले सरकारी पूजा और पंडा समाज द्वारा पारंपरिक विधि से पूजन हुआ। इसके बाद मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। मंदिर परिसर में शंखनाद, डमरू की धुन और शिवनाम की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं की आंखों में उल्लास और चेहरे पर श्रद्धा साफ दिख रही थी।
800 साल पुराने गंगेश्वरस्थान मंदिर में भी जुटे श्रद्धालु
800 साल पुराने गंगेश्वरस्थान मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। ये मंदिर जाले प्रखंड के रतनपुर गांव में स्थित है, जो कमतौल थाना क्षेत्र में आता है। इसकी स्थापना राजा नान्यदेव के पुत्र गंगदेव ने की थी। मान्यता है कि पांडवों ने वनवास के दौरान यहां भगवान शिव की आराधना की थी।
यह मंदिर अपने आध्यात्मिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। यहां प्राचीन शिवलिंग की पूजा होती है, जो आकार में अलग-अलग हैं। महाशिवरात्रि पर विशेष आयोजन होते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। भक्तों की मान्यता है कि यहां की गई प्रार्थना बेकार नहीं जाती। मंदिर का शांत वातावरण उन्हें आध्यात्मिक शांति देता है।
