जिला पदाधिकारी दरभंगा कौशल कुमार के मार्गदर्शन में ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत जिले में उपलब्ध प्राचीन पाण्डुलिपियों के सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण का कार्य निरंतर संचालित है।
इसी क्रम में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी चंदन कुमार द्वारा आज बरहेता रोड स्थित पंजीकार अरविंद मल्लिक के व्यक्तिगत संरक्षण में सुरक्षित पाण्डुलिपियों का निरीक्षण एवं सर्वेक्षण किया ।
सर्वेक्षण के दौरान अरविंद मल्लिक ने बताया कि मिथिला में पंजी परंपरा की शुरुआत कर्नाट वंश के शासक हरिसिंह देव के शासनकाल में लगभग वर्ष 1316 ईस्वी से मानी जाती है। उन्होंने बताया कि उनके संरक्षण में उपलब्ध पंजी अत्यंत प्राचीन एवं ऐतिहासिक महत्व की हैं,जो मिथिला की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किए हुए हैं।
निरीक्षण के उपरांत जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि उपलब्ध *पाण्डुलिपियाँ बसहा पत्र एवं ताड़ पत्र पर लिखी गई हैं तथा इनमें से कई पंजी लगभग 35 पुस्तों से भी अधिक पुरानी हैं। इन दुर्लभ अभिलेखों में मिथिला की वंशावली,सामाजिक संरचना एवं ऐतिहासिक परंपराओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ सुरक्षित हैं*, जो शोध एवं अध्ययन की दृष्टि से अत्यंत मूल्यवान हैं।
इस अवसर पर बीरेन्द्र नारायण सिंह ने पाण्डुलिपियों की पहचान एवं उनके ऐतिहासिक महत्व के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। , महेन्द्र नारायण चौधरी ने भी पाण्डुलिपियों की खोज एवं सर्वेक्षण कार्य में उल्लेखनीय सहयोग प्रदान किया।
जिला पदाधिकारी दरभंगा जिले के नागरिकों से अपील किया है कि यदि किसी व्यक्ति, परिवार, मठ, मंदिर अथवा संस्थान के पास किसी भी प्रकार की हस्तलिखित पाण्डुलिपि, वंशावली, ताड़पत्र, भोजपत्र अथवा अन्य प्राचीन दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उनकी जानकारी ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत साझा करें तथा संबंधित सामग्री को पोर्टल पर अपलोड कराने में सहयोग प्रदान करें।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य दरभंगा एवं मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा को संरक्षित कर राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है।
जनसहभागिता के माध्यम से जिले में उपलब्ध अमूल्य पाण्डुलिपियों का दस्तावेजीकरण संभव हो सकेगा तथा बिहार की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में दरभंगा की विशिष्ट पहचान और अधिक सुदृढ़ हो l




