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कहीं रखा जा रहा भूसा, कहीं बना दिया रसोई घर।

मधुबनी जिले के आधे दर्जन से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा जमा लिया है। कहीं अस्पताल प्रशासन के जमीन पर दुकान कर लिया गया है तो कहीं अस्पताल की जमीन पर कुड़ा-कचरा फेंका जा रहा है। जिले में लगभग आधे दर्जन ऐसे स्वास्थ्य संस्थान हैं। कई स्वास्थ्य संस्थान को तो रसोईघर के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।

 

इस कार्य में सीओ की भी लापरवाही व उदासीनता सामने आ रही है जबकि जिला स्तर से लगातार अतिक्रमण खाली करवाने को लेकर निर्देश दिए जाते रहे हैं। एक दो साल पूर्व तो यह संख्या एक दर्जन से भी अधिक थी लेकिन हाल के महीनों में जिलाधिकारी के कड़े निर्देश के बाद आधे जगहों पर से अतिक्रमण को खाली करवा लिया गया है, शेष संबंधित सीओ व बीडीओ की उदासीनता के कारण नहीं हट पा रहा है।

 

मालूम हो की पीएचसी प्रभारी के माध्यम से अतिक्रमित स्वास्थ्य संस्थानों की सूची सीओ को भेजी जाती है जिसके बाद अतिक्रमण खाली करवाया जाता है। बता दें कि सरकारी संस्थानों में अतिक्रमण के कारण स्वास्थ्य सेवाएं भी बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं, लेकिन इस समस्या का स्थाई समाधान करने में किसी की दिलचस्पी नहीं है।

 

संबंधित प्रभारियों के द्वारा बताया गया कि वर्तमान में 5 सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में भूमि या भवन आदि पर अतिक्रमणकारियों ने कब्ज़ा कर रखा है जिसमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लदनियां, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खजौली, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बसैठ, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेनीपट्टी व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घोघरडीहा शामिल है। वहीं कई अन्य भी अतिक्रमण की चपेट में हैं लेकिन कई प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी रिपोर्ट देने में लापरवाही बरत रहे हैं। इसके बाद नया सूची अपडेट नहीं किया गया है प्रभारियों के द्वारा जबकि अतिक्रमण का मामला आए दिन सामने आता रहता है।

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