30 नवंबर को आदित्य के घर हंगामे के दौरान अमृता को समझाती पुलिस। नस काटने के बाद पुलिस अमृता को लेकर अस्पताल पहुंची।
नस काटने के बाद पुलिस अमृता को लेकर अस्पताल पहुंची। अमृता ने मोबाइल से आदित्य के साथ अपनी फोटो दिखाई।
अमृता ने मोबाइल से आदित्य के साथ अपनी फोटो दिखाई। मेरे पास मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा अमृता ने आगे बताया कि, मैंने पुलिस अधीक्षक से मिलकर न्याय की गुहार भी लगाई, लेकिन न्याय नहीं मिल रहा है। सभी वर्दी वाले आपस में मिले हुए हैं।
अब उसके पास मर जाने के अलावा कोई चारा नहीं है। पहले पति से भी संबंध खत्म है। आदित्य से रिलेशन बनाने के कारण परिवार के लोगों ने भी नाता तोड़ लिया। अब मैं कहां जाऊं। दो बच्चे हैं, जो अब अनाथ हो जाएंगे। आदित्य कुमार के माता-पिता ने मेरा घर तोड़ दिया। मैं 29 नवंबर को भी आदित्य कुमार के आवास पर बच्चों के साथ पहुंची थी। इसके बाद मैं 2 दिन वहीं रही। आदित्य के पिता आए तो उन्होंने मुझे घर से निकाल दिया। इस दौरान जमकर हंगामा हुआ था। इसके बाद से आदित्य परिवार के साथ फरार है।’
कोर्ट में आदित्य से मुलाकात हुई फिर प्यार एपी कॉलोनी गयाजी की रहने वाली अमृता कुमारी की शादी विजय शंकर से 13 साल पहले हुई थी। उससे एक बेटा और एक बेटी है। बाद में पति से संबंध खराब हो गया। रामपुर थाने में विजय शंकर पर डोमेस्टिक वायलेंस का केस दर्ज कर दिया। तलाक के लिए कोर्ट में अर्जी भी डाली। केस के सिलसिले में उसका आना-जाना कोर्ट में होने लगा। इसी दौरान सेंट्रल जेल में तैनात आदित्य कुमार से जान पहचान हुई।
अमृता के अनुसार आदित्य ने पहल नंबर मांगा। फिर दोनों की बातचीत फोन पर होने लगी। फिर घर पर भी आने-जाने लगा। नजदीकियां बढ़ने पर शादी का प्रस्ताव दे दिया। साथ ही दोनों बच्चों को भी साथ रखने की बात कही। उसने इस पर सोचने के लिए कुछ समय मांगा। इसके बाद घर के ही मंदिर में शादी कर ली। बाद में गयाजी के विष्णुपद मंदिर में भी शादी की। फिर दोनों गयाजी सेंट्रल जेल के सरकारी क्वार्टर में अपने बच्चों के साथ रहने लगी। अमृता का आरोप है कि वो 28 नवंबर को आदित्य के घर गई। 1 दिसंबर को उसके माता-पिता ने घर से भगा दिया।
अमृता का आरोप है कि वो 28 नवंबर को आदित्य के घर गई। 1 दिसंबर को उसके माता-पिता ने घर से भगा दिया।- अपने घर के बाहर खड़ा असिस्टेंट जेलर।
घर से लौटने के बाद बदल गया आदित्य अमृता के अनुसार अगस्त महीने में आदित्य का ट्रांसफर दलसिंहसराय में सहायक जेलर के रूप में हो गया। यहां आने के बाद दोनों के बीच फोन पर रेगुलर बात होती थी। कुछ दिनों के बाद दोनों बच्चों के साथ दलसिंहसराय आ गई। 5 दिनों तक आदित्य के सरकारी क्वार्टर में ही रही। फिर छठ में वो अपने घर सोनपुर चला गया। मैं गयाजी चली गई। छठ के बाद वापस ड्यूटी पर लौटने के बाद वो बदल गया। धमकी भी देने लगा। 20 नवंबर को इसके व्यवहार से तंग आकर मैं फिर दलसिंहसराय पहुंची।
उसके सरकारी क्वार्टर में रहने लगी। इसी दौरान 30 नवंबर को उसके मोबाइल पर कई लड़कियों के मैसेज आए हुए थे। यह देखकर जब पूछताछ शुरू की तो वह भड़क उठा। उसने मारपीट शुरू कर दी, बच्चों को मारा। खुद पुलिस को फोन करके बुलाया। पुलिस के आने के बाद भी जेलर क्वार्टर के सामने हाई वोल्टेज ड्रामा चला। इस दौरान सूचना पर उसके पिता दिलीप सिंह भी सोनपुर से पहुंचे। अमृता ने जेलर के पिता और मां पर भी मारपीट का आरोप लगाया हैं ।
मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा है अमृता ने बताया कि, इस मामले को लेकर एसपी अरविंद प्रताप सिंह के पास पहुंची थी। एसपी ने उसकी पूरी बात सुनी और न्याय का भरोसा दिलाया। 4 दिसंबर को एसपी कार्यालय में दोनों पक्ष को बुलाया गया था। दोनों पक्ष की दलील सुनी गई, लेकिन वहां पर जेलर ने मुझे अपने साथ रखने से इनकार कर दिया। शुक्रवार को फिर से एसपी के पास अपनी बात रखने के लिए पहुंची थी, लेकिन मिलने नहीं दिया गया। मेरे पास कोई रास्ता नहीं था, मैंने हाथ की नस काट ली।
केस दर्ज कर छानबीन की जा रही है वहीं, SP अरविंद प्रताप सिंह का कहना है कि दलसिंहसराय में पोस्टेड सहायक जेलर पर आदित्य कुमार पर एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए थे। पूछताछ के लिए दोनों पक्ष को बुलाया गया था। दोनों ओर से इस मामले में पुलिस को आवेदन प्राप्त हुआ है। प्राथमिक की दर्ज कर उचित कार्रवाई की जा रही है।





