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भीषण बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, बिहार में हाई अलर्ट।

नेपाल में लगातार जारी मूसलाधार बारिश ने भयावह रूप धारण कर लिया है। बारिश और भूस्खलन से पूरे देश में भारी तबाही हुई है। राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों का जनजीवन पूरी तरह से ठप हो गया है। यातायात व्यवस्था चरमरा गई है और सरकार ने रविवार और सोमवार को राष्ट्रव्यापी अवकाश घोषित किया है।

नेपाल सरकार ने नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया है। इसका उद्देश्य राहत और बचाव कार्यों को तेजी से अंजाम देना है। देश भर में हवाई और सड़क मार्ग बंद कर दिए गए हैं। सैकड़ों वाहन रास्ते में फंसे हुए हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप

बारिश का सबसे गंभीर असर परिवहन प्रणाली पर पड़ा है। काठमांडू को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले सभी प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हैं। प्रशासन ने अगले तीन दिनों के लिए राजधानी से आने-जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इससे आपातकालीन सेवाओं को काम करने में आसानी होगी।

हवाई यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। काठमांडू स्थित त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बंद हो गया है। रनवे पर पानी भर जाने के कारण सभी आंतरिक उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। अगले कम से कम दो दिन तक उड़ान सेवाएं बहाल होने की उम्मीद नहीं है। यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

भूस्खलन और बाढ़ का खतरा

पहाड़ी इलाकों में दर्जनों स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक भारी बारिश जारी रहने की चेतावनी जारी की है। सत्रह जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। लोगों को नदियों के किनारे और पहाड़ी क्षेत्रों में रात के समय यात्रा न करने की सलाह दी गई है।

यह भीषण बारिश बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण हो रही है। यह मौसमी प्रणाली नेपाल और उत्तरी भारत के बड़े हिस्से को प्रभावित कर रही है। नेपाल की सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें। आपातकालीन सेवाएं पूरी क्षमता से काम कर रही हैं।

बिहार के सीमावर्ती जिलों पर असर

नेपाल में बाढ़ का सीधा असर भारत के बिहार राज्य पर पड़ रहा है। नेपाल से सटे सीमावर्ती जिलों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने इन क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है।

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सीतामढ़ी और मधुबनी जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। बागमती और कमला बलान नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। सीतामढ़ी में कई स्थानों पर बने डायवर्सन टूट गए हैं। इससे दर्जनों गांवों का सड़क संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।

सुपौल जिले में कोसी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। कोसी बराज से पानी छोड़े जाने के कारण हालात और गंभीर हो गए हैं। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। पूर्वी और पश्चिमी चंपारण जिलों में गंडक नदी में पानी का स्तर बढ़ा है। नदी किनारे बसे गांवों में कटाव और जलभराव की समस्या शुरू हो गई है।

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