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पटना में बिहार प्राइड परेड 2025 के तहत ट्रांसजेंडर पटना की सड़कों पर निकले. उन्होंने समाज से अपनाने की अपील की है.

बिहार प्राइड परेड 2025: सोमवार को पटना में बिहार प्राइड परेड 2025 का आयोजन हुआ. इस दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से आए ट्रांसजेंडर सड़क पर झूमते नाचते हुए जुलूस निकाले. इस परेड में पटना वूमेंस कॉलेज की छात्राओं ने भी हिस्सा लिया. हजारों की संख्या में यौनिक अल्पसंख्यक, ट्रांसजेंडर महिलाएं-पुरुष, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिकों ने भाग लिया.

बिहार प्राइड परेड 2025 

कार्यक्रम का उद्देश्य: पटना की सड़कों पर झूम रहे अहान ने बताया कि परेड का उद्देश्य समलैंगिक एवं ट्रांसजेंडर समुदाय की सामाजिक स्वीकार्यता, उनके अधिकारों की रक्षा और मौजूदा सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों पर जन जागरूकता लाना है. इस वर्ष की थीम ‘सामाजिक प्रताड़ना’ झेल रहे यौनिक और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की मुश्किलों को समाज के सामने लाना.

हस्तियों ने लिया भाग:इस आयोजन में सामाजिक कार्यों में सक्रिय कई प्रसिद्ध हस्तियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया. मुंबई से आए प्रख्यात कार्यकर्ता हरीश अय्यर और ट्रांस एक्टिविस्ट, कवयित्री एवं कलाकार कलकी सुब्रमण्यम ने कार्यक्रम में शिरकत की और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया.

बिहार प्राइड परेड 2025 

सामाजिक मुद्दों पर परेड:परेड में भाग लेने वाले लोग अपने हाथों में रंग-बिरंगे पोस्टर और बैनर लिए थे, जिन पर लिखा था – ‘हमें हक चाहिए, दया नहीं’, ‘ट्रांस राइट्स आर ह्यूमन राइट्स’, और ‘ब्लैकमेलिंग बंद करो, पहचान को सम्मान दो’. ट्रांसजेंडर रानी तिवारी ने कहा ‘यह मार्च केवल उत्सव नहीं, बल्कि समाज में फैली अस्वीकार्यता, मानसिक प्रताड़ना, ब्लैकमेलिंग, और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं के विरुद्ध एक शांतिपूर्ण परेड है. समाज को अब तय करना होगा कि वह सिर्फ सहानुभूति तक सीमित रहेगा या समानता की ठोस पहल भी करेगा. यह परेड सिर्फ एक मार्च नहीं, यह बदलाव की पुकार है.’

पिछले 13 साल से हो रहा आयोजन: कार्यक्रम की आयोजक रेशमा प्रसाद ने कहा यह आयोजन बीते 13 वर्षों से लगातार पटना में हो रहा है. यह केवल परेड नहीं बल्कि ट्रांसजेंडर समुदाय की सामाजिक स्वीकार्यता की दिशा में एक मजबूत प्रयास है.”

बिहार प्राइड परेड 2025 

“13 वर्षों में काफी जागरूकता आई है. पटना में तो स्वीकार्यता जरूर बढ़ी है. पटना में ट्रांसजेंडर समाज के लोग पहले से काफी अच्छे तरीके से जी रहे हैं. कई फील्ड में समाज के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ रही है. इस परेड के लिए मुंबई, गोवा, चेन्नई जैसे देश के अलग-अलग हिस्सों से समलैंगिक और ट्रांसजेंडर साथी पहुंचे हुए हैं.”-रेशमा प्रसाद, अध्यक्ष, दोस्ताना सफर

बिहार में ट्रांसजेंडरों की आबादी: देश में ट्रांसजेंडरों की संख्या की बात करें तो 2011 के जनगणना के अनुसार 4.88 लाख के करीब है. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक देश में सबसे अधिक ट्रांसजेंडर वाले राज्य उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र है. बिहार में ट्रांसजेंडरों की संख्या 40827 के करीब है.

बढ़ सकती है संख्या: रेशमा प्रसाद कहती हैं कि साल 2011 के बाद देश में जनगणना नहीं हुआ है. इसलिए कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है. ट्रांसजेंडरों के लिए काम करने वाली संस्था ‘दोस्ताना सफर’ की अध्यक्ष रेशमा बताती हैं कि बिहार में ट्रांसजेंडरों की संख्या 60 हजार के करीब हो गयी है. जनगणना होने के बाद संख्या स्पष्ट होगी.

बिहार प्राइड परेड 2025

कई क्षेत्र में बढ़ रहे ट्रांसडेंजर: हाल में सीतामढ़ी की रहने वाली ट्रांसडेंजर पूजा ने बिहार पुलिस की परीक्षा में सफलता प्राप्त की है. पूजा ने स्नातक तक की पढ़ाई की है. पूजा की सफलता से इनके माता पिता भी खुश हैं.

बिहार में दो ट्रांसमैन दारोगा: इससे पहले 21 अक्टूबर को बिहार पुलिस दारोगा का रिजल्ट आया था, जिसमें बिहार में तीन ट्रांसजेंडरों को सफलता मिली थी. इसमें रोनित झा का भी नाम शामिल है. छात्र संघ का चुनाव में जीत मिलने पर अध्यक्ष और अब दारोगा बन गया.

बिहार प्राइड परेड 2025

महिला ट्रांसडेंजर दारोगा: रोनित ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया था कि वे पहले लड़की थी लेकिन जब उन्हें पता चला कि वे लड़की नहीं हैं तो उन्होंने खुद को बदल लिया. इसमें परिवार के लोगों का समर्थन रहा. ट्रांसमैंन बंटी कुमार भी दारोगा बने. सबसे चर्चा में माधवी मनु थी. क्योंकि देश में पहली महिला ट्रांसडेंजर दारोगा बनी थी.

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