बाकरगंज कचहरी मोहल्ले में कच्चे नाले व जर्जर सड़क से लोग परेशान।
वार्ड-41 के बाकरगंज कचहरी टोला में गंदगी, पीने के पानी की कमी और खराब सड़कों से लोग परेशान हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नाले के पक्कीकरण और सफाई व्यवस्था की जरूरत है। जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा.
बाकरगंज कचहरी मोहल्ले में कच्चे नाले व जर्जर सड़क से लोग परेशान शहर के वार्ड-41 के बाकरगंज कचहरी टोला में गंदगी, पीने के पानी की किल्लत और जर्जर सड़कों ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाका वार्ड-41 और 39 की सीमा पर है, इसी कारण जनप्रतिनिधि यहां ध्यान नहीं देते। उन्हें लगता है कि यहां काम करने से वोट नहीं मिलेंगे। इसके बावजूद समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। मोहल्ले में सबसे बड़ी परेशानी कच्चे और खुले नाले से है।
नाले की गंदगी खुले में फैलती है। सूअर उसमें घूमते हैं और गंदगी को सड़क और गलियों में फैला देते हैं। इससे वातावरण दूषित होता है। बच्चों के लिए खतरा बना रहता है। लोगों का कहना है कि यदि नाले का पक्कीकरण हो जाए और ढक्कन लग जाए तो गंदगी कम होगी। साथ ही सफाई और कचरा उठाव की व्यवस्था भी जरूरी है। मोहल्ले में बच्चों के खेलने के लिए कोई जगह नहीं है। यह इलाका वार्ड 41 का बाहरी हिस्सा है और घनी आबादी वाला है। लोगों ने सुझाव दिया कि जर्जर कचहरी ऑफिस को तोड़कर वहां पार्क बना दिया जाए।
इससे बच्चों को खेलने की जगह मिलेगी और लोग सुबह-शाम टहल भी सकेंगे। बिजली विभाग की ओर से लगाए गए प्रीपेड मीटर को लेकर भी मोहल्ले वालों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि सीमित बिजली खर्च करने के बावजूद बार-बार रिचार्ज कराना पड़ता है। पंखा और टीवी भी पहले की तरह नहीं चल पा रहे हैं। इसके बावजूद बिल ज्यादा आ रहा है। गुड्डू, ओम शंकर, प्रमानंद भंडारी, चंदन कुमार, शंकर कुमार सहित कई लोगों ने नगर निगम से मांग की कि सबसे पहले कच्चे और खुले नाले पर ध्यान दिया जाए। नाले को पक्का किया जाए और ढक्कन लगाया जाए। साथ ही घर-घर से कचरा उठाव की व्यवस्था की जाए। यदि ये दोनों काम हो जाएं तो लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
नल-जल योजना का लाभ भी यहां के लोगों को नहीं मिल रहा है। मोहल्ले में नगर निगम के ज्यादातर चापाकल या तो खराब हैं या पानी देना बंद कर चुके हैं। गंदगी और जलापूर्ति के अभाव में पीने के पानी की किल्लत से लोग परेशान हैं। इसके अलावा मोहल्ले की जर्जर गली भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। लोगों का कहना है कि यह इलाका सीमावर्ती होने की वजह से उपेक्षा का शिकार है। जनप्रतिनिधि यह मानकर चलते हैं कि यहां किए गए कार्यों का रिटर्न वोट के रूप में नहीं मिलेगा। इसलिए यहां खर्च होने वाली राशि को दूसरे मोहल्ले में खर्च कर दिया जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि यहां के लोग सालों से अपना जनप्रतिनिधि के तौर पर एक ही व्यक्ति को चुनते हुए आ रहे हैं।
इसके बावजूद समस्या है कि खत्म होने का नाम नहीं ले रही। लोगों ने कहा कि यहां सबसे ज्यादा परेशान खुले नाले से फैलने वाली गंदगी से होते हैं। खुला क्षेत्र होने की वजह से सूअर नाले की गंदगी को सड़क और गली में फैलाते रहते हैं। इससे न केवल गंदगी से वातावरण दूषित होता है, बल्कि बच्चों के लिए हमेशा खतरा भी बना रहता है। यदि नाले का पक्कीकरण होने के साथ ही सफाई और कचरा उठाव की समुचित व्यवस्था हो जाए तो लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। -बोले जिम्मेदार- ये भी पढ़ें: एमपी की लड़की से वैशाली में गंदा काम, एक डॉक्टर ने नौकरी के नाम पर बुलाकर…
आरोपी गिरफ्तार वार्ड के लोगों की जो भी शिकायत है उसे दूर करने का प्रयास किया जाएगा। मेरे हिसाब से जितनी सहूलियत वार्ड के अन्य मोहल्ले के लोगों को मिली है, उतना ही पुराने कचहरी ऑफिस के पास के मोहल्ले के लोगों को भी दी गई है। रही बात नाले की तो उसे ठीक कराने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। – शंकर जायसवाल, वार्ड 41 के पार्षद। बाकरगंज कचहरी टोला में नगर निगम की ओर से नियमित रूप से सफाई करायी जाती है। समय-समय पर इसकी निगरानी भी की जाती है। इसके अलावा वहां नगर निगम की ओर से नियमित रूप से वाटर टैंकर भी भेजे जाते हैं।
