आदर्श नगर कॉलोनी में जल निकासी व पेयजल की व्यवस्था हो तो सुधरे हालात मधुबनी । मधुबनी शहर को नगर निगम का दर्जा प्राप्त हुए दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में कोई ठोस बदलाव नहीं दिख रहा। न तो बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं और न ढांचागत सुधार हो रहा है।
नागरिकों के जीवनस्तर में सुधार होता दिख नहीं रहा है। जबकि आदर्श नगर कॉलोनी जिला मुख्यालय से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कालोनी प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रही है। कालोनी के अरविंद कुमार झा व रचना कुमारी ने कहा कि वर्षों पहले ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए लोगों ने शहरीकृत जीवन जीने के लिए यहां बसने का निर्णय लिया था। शहर में बेहतर जीवन की कल्पना लिए उन्होंने लाखों रुपये खर्च कर आशियाने बनाए। समय के साथ यहां कई विभागों के अधिकारी, कर्मचारी और मध्यमवर्गीय परिवार रहने लगे, जिससे कॉलोनी की सामाजिक और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई। लेकिन शहरी जीवन की अपेक्षित सुविधाएं- जैसे सड़क, नाला, जलनिकासी और सफाई-यहां कभी नहीं पहुंच पाईं। शिवकांत झा और नूतन कुमारी ने कहा कि कालोनी के लोग समय-समय पर नगर प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से बार-बार शिकायतें करते रहे।
हर बार लोगों को आश्वासन मिला कि जल्द समाधान होगा, परंतु हर बार यह आश्वासन खोखला साबित हुआ। नतीजा यह रहा कि कॉलोनी की समस्याएं दिन-ब-दिन गंभीर होती चली गईं। नगर निगम बनने के बाद जब आदर्श नगर जैसे इलाकों को इसके अधीन शामिल किया गया, तो स्थानीय लोगों को लगा कि अब उनका जीवन बदलेगा। लंबे समय से झेली जा रही समस्याओं से राहत मिलेगी। कॉलोनीवासियों के चेहरों पर एक नई उम्मीद की रोशनी दिखने लगी थी, परंतु यह खुशी क्षणिक सिद्ध हुई। चुनावी वादे और प्रचार के बाद जब नेतागण सत्ता में आए तो इस कॉलोनी को भूल गये।
रोहित कुमार झा ने कहा कि आदर्श नगर कॉलोनी की सबसे बड़ी समस्या जलजमाव है। जीवछ ठाकुर के घर से लेकर सुरेंद्र झा घर तक बारिश के मौसम में छह महीने यहां के लोग गंदे पानी से घिरे रहते हैं। बारिश का पानी सड़कों और गलियों में भर जाता है। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से यह पानी लंबे समय तक जमा रहता है, जिससे दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। रंजीत कुमार साह ने कहा कि सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। नालों का निर्माण या तो अधूरा है या फिर उनका कोई अस्तित्व ही नहीं है। सफाई कर्मियों की लापरवाही से गलियों में गंदगी का अंबार लगा रहता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते क्योंकि रास्ते जलमग्न होते हैं। अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता बनी रहती है। जलजमाव इतना अधिक होता है कि घर से निकलने के लिए लोगों को या तो गंदे पानी में चलना पड़ता है या फिर लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ता है। यह स्थिति न सिर्फ लोगों की दिनचर्या को बाधित करती है, बल्कि उनके स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव डालती है।
शंकर झा का आरोप है कि नगर निगम द्वारा सुविधा के नाम पर टैक्स वसूली तो नियमित रूप से की जाती है, लेकिन बदले में नागरिकों को क्या दिया जा रहा है, यह एक बड़ा सवाल है। क्या टैक्स केवल नगर निगम के अस्तित्व को बनाये रखने के लिए है, या फिर इसका उद्देश्य नागरिकों को बेहतर जीवन देना है? विकास कार्यों का वादा करके जनप्रतिनिधि चुनाव जीतते हैं, लेकिन बाद में वे जनता की आवाज़ सुनना तक बंद कर देते हैं।
आदर्श कॉलोनी में निरंतर सफाई की नहीं होने से समस्या: आदर्श कालोनी के निवासी संजय कुमार मधुबनी नगर निगम की ओर से शहर में प्रतिदिन सफाई के दावे भले ही जोर-शोर से किए जा रहे हों, लेकिन जब इन दावों की पड़ताल जमीन पर की जाती है, तो सच्चाई कुछ और ही सामने आती है। शहर से सटे आदर्श कॉलोनी की स्थिति साफ दर्शाती है कि नगर निगम के दावे कितने खोखले और दिखावटी हैं। यहां की गलियों में महीनों से गंदा पानी जमा है। सड़कें कीचड़ में तब्दील हो चुकी हैं और चारों ओर फैला कूड़ा-कचरा ना सिर्फ दृश्य प्रदूषण का कारण बना है, बल्कि वातावरण में बदबू का आलम ऐसा है कि लोग अपने ही घरों में कैद होकर रहने को विवश हैं।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि आमजन के स्वास्थ्य पर खतरा मंडराने लगा है। मच्छर, मक्खियों और दुर्गंध के बीच रहना एक बड़ी मजबूरी बन चुका है। स्ट्रीट लाइट की समस्या गुणानंद झा ने कहा कि मधुबनी की आदर्श कॉलोनी, जो नाम से तो ‘आदर्श है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लगातार उपेक्षा का शिकार हो रही है। इनमें से एक प्रमुख और गंभीर समस्या है- स्ट्रीट लाइट की का न होना। जैसे ही सूरज ढलता है, यह पूरी कॉलोनी घना अंधकार ओढ़ लेती है।
यह न केवल राहगीरों के लिए असुविधाओं का कारण बनती है, बल्कि क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। शाम के समय कॉलोनी की गलियों में बच्चों की चहल-पहल होनी चाहिए। बुजुर्गों की सैर और परिवारों की सहज आवाजाही होनी चाहिए, लेकिन इसके स्थान पर फैला अंधेरा एक डरावना सन्नाटा पैदा करता है। महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक असुरक्षित महसूस करते हैं। अंधेरे में गड्ढे, सड़क पर फैला कूड़ा, अथवा आवारा जानवर भी दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं।
चिंताजनक यह है कि इस अंधेरे का लाभ उठाकर आपराधिक तत्व सक्रिय हो सकते हैं। चोरी, छेड़छाड़ या अन्य असामाजिक गतिविधियों की संभावना बढ़ जाती है। कॉलोनीवासियों का यह भी कहना है कि वे कई बार प्रशासन से स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग कर चुके हैं, परंतु अभी तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। कागजाें पर सिमटी योजनाएं सुनील सिंह ने कहा कि सरकार की महत्वाकांक्षी सात निश्चय योजना सिर्फ कागजों पर सजी-संवरी है, लेकिन धरातल पर इसका कोई असर नजर नहीं आता।
इस योजना के अंतर्गत हर वार्ड में सड़क, गली और नाले के निर्माण का वादा किया गया था, लेकिन इस गली की जमीनी सच्चाई इससे कोसों दूर है। इस गली में न तो नाला बना है, न ही साफ-सफाई की कोई नियमित व्यवस्था है। थोड़ी-सी बारिश में गली की सड़कों पर गंदा पानी भर जाता है, जिससे जलजमाव और बदबू के साथ-साथ बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
स्थानीय लोग सालों से इसी गंदगी और अव्यवस्था के बीच रहने को मजबूर हैं। यह स्थिति मुख्यमंत्री की विकास योजनाओं की पोल खोलती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी कोई जनप्रतिनिधि या नगर निगम अधिकारी से इस बारे में पूछा जाता है, तो वही पुराना जवाब मिलता है – “काम जल्द शुरू होगा।” लेकिन ये वादे अब वर्षों से सुनते-सुनते बासी हो चुके हैं। गली की हालत जस की तस बनी हुई है और लोगों का भरोसा अब इन वादों से उठ चुका है। ———–बोले जिम्मेदार—— शहर के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए नगर निगम निरंतर प्रयास कर रहा है।
नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में विशेष पहल के तहत नाला और सड़क निर्माण कार्य को शीघ्र आरंभ करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और कार्य शीघ्र शुरू होने की उम्मीद है। विशेष रूप से आदर्श नगर कॉलोनी लंबे समय से जलजमाव की समस्या ने जनजीवन को प्रभावित किया है। प्रस्तावित नाला और सड़क निर्माण कार्य के पूर्ण होने से इस समस्या से स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद है। -अनिल कुमार चौधरी , नगर आयुक्त मधुबनी





