Thursday, April 23, 2026
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संस्कृत शिक्षा बेहद रोजगारोन्मुखी : कुलपति

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स्वागत भाषण में छात्रों के बीच जगायी बड़ी उम्मीद

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कहा- संस्कृत पढ़कर भी पा सकते हैं बड़े पद व यश – कीर्ति

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— सीनेट की 49 वीं बैठक में सभी सदस्यों से मांगा पूर्ववत सहयोग

दरभंगा।

कामेश्वरसिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के दरबार हॉल में बुधवार को सर्वोच्च प्राधिकार सीनेट यानी अधिषद् की 49वीं बैठक के अध्यक्ष बिहार के माननीय राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के परम सम्माननीय कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) श्री सय्यद अता हसनैन महोदय, माननीय कुलाधिपति सचिवालय के आदरणीय पदाधिकारी गण, अधिषद के सदस्य के रूप में उपस्थित सम्माननीय पूर्व कुलपति गण, बिहार विधान मण्डल के माननीय सदस्य गण, सङ्कायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, प्रधानाचार्य, बिहार सरकार तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि सदस्यगण तथा संस्कृत शिक्षा एवं संस्कृत विश्वविद्यालय के विकास हेतु निरन्तर चिन्तनशील विद्वान् एवं कर्त्तव्यनिष्ठ शिक्षक, पदाधिकारी, कर्मचारी, स्नेहभाजन छात्रगण तथा भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत के प्रचार प्रसार में संलग्न पत्रकार बन्धुओं का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय ने सभी मान्य सदस्यों से पूर्ववत सहयोग करते रहने की गुजारिश की। उन्होंने सामान्य मिथक से विपरीत खासकर छात्रों के बीच यह कहते हुए उम्मीद की एक बहुत बड़ी लकीर खींचने का प्रयास किया कि संस्कृत पढ़नेवाले बच्चे भी बड़े बड़े ओहदे व यश-कीर्ति हासिल कर सकते हैं। इसके लिए सिर्फ आवश्यकता है पूर्ण लग्न, समर्पण एवं निष्ठापूर्वक अध्ययन की। उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ डॉ निशिकांत ने बताया कि कुलपति ने बड़ा सन्देश देते हुए वर्तमान परिपेक्ष्य में भी संस्कृत शिक्षा को बेहद रोजगारोन्मुखी कहा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि

संस्कृत के छात्रों को भी अन्य विषयों के छात्रों के समान पर्याप्त रोजगार के अवसर प्राप्त हैं।

हमारे पाठ्यक्रमों में संस्कृत के अतिरिक्त हिन्दी, अंग्रेजी, राजनीतिशास्त्र, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, गणित, कम्प्यूटर, सामान्यज्ञान एवं सामान्यविज्ञान आदि अनेक विषयों का समावेश है। इस पाठ्यक्रम का परिश्रमपूर्वक अध्ययन कर संस्कृत के छात्र अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों की भाँति यू.पी.एस.सी., बी.पी.एस.सी. एवं बैंकिग आदि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर प्राशासनिक पदों पर नियुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। सेना में धर्म गुरु एवं संस्कृत महाविद्यालयों एवं

 

 

विद्यालयों में शिक्षक के पदों पर नियुक्ति के विशेष अवसर हैं। प्रतिवर्ष शिक्षाशास्त्र उत्तीर्ण होकर सैकडो छात्र संस्कृत शिक्षक पद पर नियुक्त हो रहे हैं। कुलपति ने संस्कृत शिक्षा की पुरजोर वकालत करते हुए यहां तक कहा कि संस्कृत पढ़कर जो सरकारी अथवा अर्धसरकारी सेवा में नहीं भी जाना चाहते हैं , उसके लिए भी यहां रोजगार के पर्याप्त अवसर प्राप्त हैं। जैसे कर्मकाण्ड, हस्तरेखा – विज्ञान, वास्तुशास्त्र, भागवत प्रवचन आदि का एवं कुण्डली निर्माण के द्वारा प्रत्येक संस्कृतज्ञ रोजगार के साथ-साथ सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्राप्त करते रहे हैं। इसी क्रम में विश्वविद्यालय के संस्थापक, दानवीर स्वर्गीय महाराजाधिराज डॉ. (सर) कामेश्वर सिंह जी का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कुलपति ने उन्हें सम्पूर्ण सदन एवं विश्वविद्यालय परिवार की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने भारत के संस्कृत विश्वविद्यालयों में दरभंगा के इस द्वितीय प्राचीनतम संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले तत्कालीन माननीय कुलाधिपति सह राज्यपाल डॉ जाकिर हुसैन एवं तत्कालीन माननीय मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया।

 

कुलपति प्रो. पांडेय ने प्रत्यक्ष प्रमाण के तौर पर संस्कृत विश्वविद्यालय की चर्चा करते हुए उम्मीद जगाई कि इसके परिश्रमी एवं मेधावी छात्र देश के विभिन्न भागों में आई.ए.एस., आई.पी.एस., बैंकिंग एवं भारतीय सेना में नियुक्ति पाकर सेवारत हैं। हमारे प्राच्य विषयक छात्र विविध विश्वविद्यालयों में कुलपति, प्राचार्य, प्रधानाचार्य एवं शिक्षक के पदों को सुशोभित करते हुए विश्वविद्यालय का नाम रौशन कर रहे हैं। जो छात्र नौकरी नहीं पा सके हैं, वे भी स्वतन्त्र कर्मकाण्डादि व्यवसाय से अर्थोपार्जन कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने अपने छात्रों के साथ-साथ अन्य इच्छुक छात्रों को प्राच्यविषयों के साथ-साथ अंग्रेजी एवं कम्प्यूटरज्ञान से परिपूर्ण शिक्षा प्रदान कराने की व्यवस्था की है। इसके साथ ही संस्कृत सम्भाषण के प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की है। नेट एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने हेतु हम विशेष वर्गों का संचालन करते हैं। ध्यान रहे, ये सारी व्यवस्थाएँ निःशुल्क है। इसका संचालन हमारे विद्वान् एवं समर्पित शिक्षक एवं शोधच्छात्र कर रहे हैं। छात्रों के सर्वाङ्गीण विकास के लिए शैक्षणिक कार्यों के साथ- साथ क्रीड़ा, व्यायाम, एन.एस.एस. आदि गतिविधियाँ भी चलायी जा रही हैं। सांस्कृतिक पाठ्य सहगामी क्रियाओं तथा छात्रों में सामाजिक जागरूकता लाने के लिए- शास्त्र संवर्धिनी, संस्कृत प्रचार मंच, कलारञ्जिनी, पर्यावरण मञ्च, युवा चेतना मञ्च, क्रीड़ा एवं स्वास्थ्य मंच, महिला प्रकोष्ठ आदि परिषदों का संचालन होता है। नूतन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के संवर्धन की दिशा में नए-नए कार्यक्रम प्रगति पर हैं।

 

इसी क्रम में सभी मान्य सदस्यों से कुलपति प्रो. पांडेय ने आग्रह किया कि इस विश्वविद्यालय की आय का आन्तरिक स्रोत बहुत कम है जिससे अनेक कार्य बाधित होते है। यहाँ निःशुल्क शिक्षा के साथ उसकी भरपाई नहीं हो सकती है। इसके अतिरिक्त एनईपी-2020 के आधार पर निर्मित चतुर्वर्षीय शास्त्री (स्नातक) पाठ्यक्रम संचालन के लिए राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों में शिक्षकों एवं कर्मियों के बहुत से पद रिक्त हैं जिन पर नियुक्ति होना आवश्यक है। साथ ही नूतन विषय को पढ़ाने के लिए बहुत से पद सृजित करने की भी आवश्यकता है। कई अंगीभूत महाविद्यालयों में आधारभूत संरचना की कमी है।

 

 

राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बहुविषयक संस्था के रूप में इस विश्वविद्यालय को विकसित करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार के लक्ष्यानुसार शीघ्र समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन नामांकन, परीक्षादि कार्य का संचालन अपेक्षित है।।इसके लिए हमारे पास तकनीकी संसाधनों एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन का अत्यन्त अभाव है। इन कार्यों में आप सभी सदस्यों के साथ- साथ विशेषतः माननीय कुलाधिपति महोदय का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी का हार्दिक सहयोग मिलता रहेगा और इन बाधाओं को भी हम सफलतापूर्वक पार कर सकेंगें।

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