Thursday, April 23, 2026
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जीडीपी के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रति व्यक्ति आय तथा मानव प्रसन्नता आदि भी शामिल है विकसित भारत निर्माण में- कुलाधिपति

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खेल एवं शारीरिक शिक्षा निदेशालय का उद्घाटन एवं खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स विजेताओं को कुलाधिपति ने किया सम्मानित

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व्यवसाय का क्षेत्र बहुत ही विस्तृत एवं समाजोपयोगी है, जिसमें नवाचार की व्यापक संभावनाएं हैं। व्यावसायिक अनुसंधान सिर्फ देश की जीडीपी बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के लोगों के कल्याण के लिए भी होना चाहिए। विकसित भारत निर्माण में देश के डीजीपी के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रति व्यक्ति आय तथा मानव प्रसन्नता आदि क्षेत्र भी शामिल हैं। यदि समाज एवं सरकार का हर अंग मिलकर अच्छा काम करे तो विकसित भारत-2047 का लक्ष्य आसानी से पूरा हो सकता है।

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उक्त बातें बिहार के राज्यपाल सह विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवा निवृत्ति) सय्यद अता हसनैन ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के विश्वविद्यालय वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग के तत्त्वावधान में “समकालीन समय में व्यावसायिक अनुसंधान” विषय पर जुबिली हॉल में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन एवं खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स- 2025 के विजेताओं के सम्मान कार्यक्रम का मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन करते हुए कही।

 

कुलाधिपति ने कहा कि सम्मेलन का विषय काफी विस्तृत एवं प्रासंगिक है, जिसमें आने से मुझे काफी खुशी हो रही है। विश्वविद्यालय का वातावरण देखकर मुझे अच्छा लगा। यद्यपि बाधाएं भी आती हैं, परंतु व्यवसाय अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए आपसी समझ, नेतृत्व क्षमता एवं निरंतरता आवश्यक है।

 

बिहार में बौद्धिक क्षमता अत्यधिक है। अगला 5 से 10 वर्ष बिहार का ही होगा। हम ज्यादातर राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक संदेश देते हैं, परंतु सामाजिक संदेश देने की अधिक जरूरत है। उन्होंने नशा मुक्ति, टीवी उन्मूलन तथा प्लास्टिक से मुक्ति का संदेश देते हुए कहा कि नशा से न केवल व्यक्ति, बल्कि परिवार एवं उनके खानदान नष्ट हो सकता है। जिस तरह भारत ने पोलियो एवं कोविड आदि से लड़कर खत्म किया है, उसी तरह हम लोगों जागरूकता के माध्यम से टीबी मुक्त भारत बनाएंगे। आज प्लास्टिक की चपेट में मानव के साथ जानवर भी आ रहे हैं। यह हमारे जीवन को विकलांग बना रहा है। यह हानिकारक प्लास्टिक समाज के लिए बिल्कुल ही स्वीकार नहीं होना चाहिए।

 

स्वागत संबोधन करते हुए कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने कहा कि मिथिला ज्ञान एवं सीता की जन्मभूमि है। 5 अगस्त, 1972 को स्थापित यह विश्वविद्यालय दो प्रमंडलों-दरभंगा एवं मुंगेर के चार जिलों में फैला है, जिसमें 44 अंगीभूत कॉलेज, 40 संबद्धता प्राप्त कॉलेज, 33 बी एड कॉलेज तथा 07 सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूशन हैं। कुलपति ने पीपीटी के माध्यम से विश्वविद्यालय के क्रियाकलापों की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि यहां 24 विषयों में स्नातकोत्तर एवं पीएच डी कराए जाते हैं। यहां के 26 कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई हो रही है। 201 एकड़ परिसर में फैला हुआ यह विश्वविद्यालय में गत 03 वर्षों में 362 शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसे पीएम उषा के मेरू के अंतर्गत शोध विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है। बिहार में समर्थ पोर्टल एवं डिजी लॉकर की शुरुआत करने में यह विश्वविद्यालय राज्य में प्रथम है। खेल के क्षेत्र में भी यह विश्वविद्यालय काफी आगे है। यहां का एडवांस्ड रिसर्च सेन्टर, केन्द्रीय पुस्तकालय काफी समृद्ध है, जबकि राज पुस्तकालय में दुर्लभ पुस्तकें उपलब्ध हैं। पारंपरिक विश्वविद्यालयों में हमारा विश्वविद्यालय नैक द्वारा उच्च स्कोर- बी प्लस प्लस प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यह पांच दिवसीय सम्मेलन आयोजक विभाग तथा विश्वविद्यालय के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा। डॉ निर्मला कुशवाह ने सम्मेलन के विषय वस्तु को रखते हुए व्यवसायिक अनुसंधान के महत्त्वों एवं उसकी समाज में उपयोगिता की चर्चा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शोध को बढ़ावा देता है, जिसका उपयोग समाज की बेहतरीन के लिए हो सकता है।
इंडियन कॉमर्स एसोशिएशन के वाइस प्रेसिडेंट एवं गेस्ट ऑफ़ ओनर प्रो एन के झा ने कहा कि आज शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका बदल रही है। एनआइपी- 2020 पूरे शैक्षणिक वातावरण को परिवर्तित कर रहा है। शोध विश्व में परिवर्तन की क्षमता रखता है। इस पांच दिवसीय सम्मेलन से शोधार्थियों एवं समाज को काफी लाभ मिलेगा। उन्होंने सम्मेलन के विषय को बहुआयामी एवं विस्तृत बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने से समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। एमजीसीजीबी, सतना, मध्य प्रदेश के पूर्व कुलपति एवं गेस्ट ऑफ़ ओनर प्रो एन सी गौतम ने कहा कि इस समय देश में करीब 11 सौ विश्वविद्यालय संचालित हैं। जीवन में हमेशा सकारात्मकता बनाए रखें। यहां के छात्र न केवल विश्वविद्यालय, बल्कि देश का भी नाम रोशन किया है। यहां प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कुलपति से प्रेरक छात्रों के लिए प्रोत्साहन फंड बनाने का आग्रह करते हुए कहा कि वे शिक्षक और विश्वविद्यालय अधिक भाग्यशाली होते हैं, जिनकी पहचान उनके सफल छात्र-छात्राओं से होती है।
विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक समन्वयक डॉ प्रियंका राय ने विश्वविद्यालय की खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की चर्चा एवं उपलब्धियों को रेखांकित किया। इस अवसर पर कुलाधिपति ने खेल एवं शारीरिक शिक्षा निदेशालय का उद्घाटन किया तथा विभिन्न विधाओं में सफल छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय की ओर से प्रोत्साहन राशि प्रदान किया। वहीं डॉ अंकित कुमार सिंह संपादित ‘प्लांट डेरिवड एंटी कैंसर ड्रग्स’ नामक पुस्तक का भी राज्यपाल ने विमोचन किया। कार्यक्रम में सम्मेलन के संरक्षक प्रो हरे कृष्णा सिंह, वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ राजकुमार साह, कुलसचिव डॉ दिव्या रानी हंसदा, राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा, संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, पदाधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी एवं 250 से अधिक प्रतिभागी उपस्थित थे। कार्यक्रम का प्रारंभ विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग के छात्रों द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान से हुआ। तत्पश्चात दीप प्रज्वलन कर सम्मेलन का उद्घाटन किया गया। फिर बिहार गीत एवं विश्वविद्यालय कुलगीत प्रस्तुत किया गया। अतिथियों का स्वागत पाग, चादर, स्मृति चिह्न एवं मिथिला पेंटिंग्स आदि से किया गया। कार्यक्रम का संचालन सम्मेलन के संयोजक के डॉ दिवाकर झा ने किया। समापन राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान से हुआ।

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