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दरभंगा : DMCH की परीक्षा में धांधली, 2021 बैच के एक छात्र के बदले दूसरे अभ्यर्थी ने दिया एग्जाम DMCH 

डीएमसीएच में फर्जी तरीके से परीक्षा देने का मामला सामने आया है। 2021 बैच के एक छात्र की जगह किसी और ने सेकंड प्रोफेशनल सप्लीमेंट्री परीक्षा दी थी। एनएमसी की शिकायत पर जांच कमेटी बनाई गई है, जिसमें पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और फर्माकोलोजी विभाग के डॉक्टर शामिल हैं।

दरभंगा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में धांधली 2021 बैच के छात्र ने फर्जी तरीके से दूसरे को बिठाया DMCH ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जांच समिति में पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और फार्माकोलॉजी विभाग के डॉक्टर शामिल

DMCH दरभंगा: बिहार के दरभंगा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (DMCH) में एक और परीक्षा घोटाला सामने आया है। इस बार मामला 2021 बैच के एक छात्र की ओर से फर्जी तरीके से सेकंड प्रोफेशनल सप्लीमेंट्री परीक्षा देने का है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को मिली शिकायत के बाद DMCH ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह मामला तब प्रकाश में आया जब NMC को एक गुप्त शिकायत मिली जिसमें आरोप लगाया गया था कि 2021 बैच के एक छात्र की जगह किसी और ने सेकंड प्रोफेशनल सप्लीमेंट्री परीक्षा दी थी। शिकायत मिलने के बाद NMC ने DMCH के प्रिंसिपल और आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, जिससे DMCH संबद्ध है, को पत्र लिखकर मामले की जांच के आदेश दिए। DMCH के प्रिंसिपल डॉ. के एन मिश्रा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन कर जांच का आदेश दिया गया है।’ जांच समिति में पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और फार्माकोलॉजी विभाग के डॉक्टरों को शामिल किया गया है। समिति अब उस छात्र की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिसने दूसरे की जगह परीक्षा दी थी। यह मामला NEET परीक्षा में धांधली के एक अन्य मामले के सामने आने के तुरंत बाद आया है। ऐसे में DMCH प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। देखना होगा कि DMCH प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और NMC इस पर क्या एक्शन लेता है।

डॉ. मिश्रा ने कहा ‘इस सिलसिले में विश्वविद्यालय से पत्र प्राप्त हुआ है। जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है। रिपोर्ट आने पर उसे विश्वविद्यालय को भेज दिया जायेगा’। यह घटना मेडिकल शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े को उजागर करती है। यह चिंता का विषय है कि एक छात्र बिना परीक्षा दिए ही मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। इससे मरीजों के स्वास्थ्य पर भी खतरा पैदा हो सकता है। सरकार और मेडिकल काउंसिल को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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