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आजादी के बाद भी कोई बदलाव नहीं आजादी के 78 वर्षों के बाद भी इस क्षेत्र की स्थिति जस की तस बनी हुई है. बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी के कारण ग्रामीणों को 500 मीटर की दूरी तय करने के लिए 6 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है. बछराजा नदी इस क्षेत्र से होकर गुजरती है, और इस पर स्थायी पुल न होने के कारण ग्रामीणों को प्रतिवर्ष चंदा इकट्ठा करके चचरी का पुल बनाना पड़ता है. हालांकि, इस अस्थायी पुल से आवश्यक संसाधनों और कृषि उपकरणों को पार कराना संभव नहीं होता. ग्रामीणों की मांग, सरकार सुने आवाज स्थानीय ग्रामीण वर्षों से इस नदी पर पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं. नदी के उस पार पंचायत मुख्यालय, बैंक, सरकारी भवन, मंदिर और अन्य आवश्यक सुविधाएं स्थित हैं.
बैंक से पैसे निकालना हो, बाजार से सामान खरीदना हो या कृषि कार्य करना हो, ग्रामीणों को हमेशा इस नदी को पार करना पड़ता है. करीब 30 वर्षों से हर चुनाव में प्रत्याशियों से पुल निर्माण की मांग की जाती रही है, लेकिन चुनाव के बाद नेता वापस लौटकर नहीं आते. अब यहां लिंक रोड भी बन चुका है, फिर भी पुल न बनने से लोगों की परेशानियां बरकरार हैं. यदि पुल बन जाए, तो लोगों की यात्रा की दूरी 6 किलोमीटर से घटकर 500 मीटर रह जाएगी, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो जाएगी और कृषि कार्य सुचारु रूप से हो पाएंगे.

हर साल अस्थायी चचरी पुल बनाया जाता है, लेकिन वह टिकाऊ नहीं होता. पुल की अनुपस्थिति के कारण ग्रामीणों को 500 मीटर की दूरी तय करने के लिए 6 किलोमीटर घूमना पड़ता है. आर्या झा/मधुबनी- बेनीपट्टी प्रखंड के अकुरी गांव में बछराजा नदी पर पुल न होने के कारण हजारों एकड़ कृषि योग्य भूमि अनुपयोगी पड़ी है. स्थानीय किसान बेहद परेशान हैं क्योंकि ग्रामीणों के सहयोग से प्रतिवर्ष चचरी का पुल बनाया जाता है, लेकिन यह पुल अधिक समय तक टिक नहीं पाता. इस पुल से लोग तो पार कर जाते हैं, लेकिन बैलगाड़ी या अन्य भारी सामान ले जाना संभव नहीं होता, जिससे किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. अगर इस नदी पर एक स्थायी पुल बना दिया जाए, तो यहां के किसानों के लिए धान और गेहूं की खेती वरदान साबित हो सकती है.