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निजी चिकित्सा संस्थानों की फैसिलिटी रजिस्ट्री पर चर्चा, डिजिटल हेल्थ मिशन पंजीकरण अनिवार्य।

कार्यशाला में शामिल लोग। मधुबनी जिले के सदर अस्पताल सभागार में शुक्रवार को सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जिला समन्वयक कुमार प्रिय रंजन (आयुष्मान) और सहायक औषधि निदेशक ने औषधि विक्रेताओं को डिजिटलीकरण के लाभों से अवगत कराया।

 

डिजिटलीकरण की दिशा में केंद्र और राज्य सरकारें तेजी से कदम बढ़ा रही हैं। आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन (एबीडीएम) के तहत निजी चिकित्सा संस्थानों की शत-प्रतिशत हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (एचएफआर) सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य निजी स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी को सरल बनाना है, जिससे मरीजों और सरकार दोनों को लाभ होगा।

 

इसी क्रम में, बिहार सरकार ने राज्य के सभी जिलों में संचालित नर्सिंग होम, ओपीडी क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब, फिजियोथेरेपी सेंटर, रेडियोलॉजी क्लीनिक और फार्मेसी के लिए एचएफआर संख्या जारी करना अनिवार्य कर दिया है। स्वास्थ्य सचिव के निर्देशानुसार, यह कदम चिकित्सा क्षेत्र में पारदर्शिता और कुशलता लाने के लिए उठाया गया है। कार्यशाला में जिले के औषधि निरीक्षक, औषधि एसोसिएशन के अध्यक्ष, सचिव और कई थोक एवं खुदरा विक्रेताओं ने भाग लिया। परियोजना समन्वयक जयशंकर कुमार ने एचएफआर बनाने की प्रक्रिया और इसके लिए आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दी।

 

औषधि विक्रेताओं को बताया गया कि वे स्वयं वेबसाइट [nhpr.abdm.gov.in](https://nhpr.abdm.gov.in) पर जाकर अपना पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण के लिए आधार कार्ड, ईमेल आईडी, निबंधन प्रमाण पत्र और औषधालय का फोटो अनिवार्य है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाना है। हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन के तहत सभी चिकित्सा संस्थानों और खुदरा मेडिकल स्टोर्स को पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है।

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