बिहार में जन्म, कर्नाटक से पढ़ाई, गुजरात में कुश्ती और पंजाब से प्रशिक्षण, जानिए कॉम्बैट कुश्ती प्लेयर पूजा की अद्भुत कहानी।
जानिए कॉम्बैट कुश्ती प्लेयर पूजा कुमारी की कहानी
राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की बात करें तो, उड़ीसा की धरती हो या फिर दिल्ली, कर्नाटक हो या मौजूदा समय में गोरखपुर में हो रहे इस कुश्ती प्रतियोगिता के दूसरे राष्ट्रीय आयोजन में भी उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को हराकर गोल्ड मेडल हासिल करके इंटरनेशनल चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया है.
कुश्ती की इस प्रतियोगिता में ओलंपिक नहीं खेला जाता है लेकिन एशियाई गेम की पूजा चैंपियन होकर ओलंपिक चैंपियन भी बनना चाहती है. वह खेल फेडरेशन से इस गेम को भी ओलंपिक में शामिल करने की मांग करती है. उनके यहां तक पहुंचने की अद्भुत कहानी है.
पूजा ने जन्म बिहार में लिया. कुछ वर्षों की पढ़ाई के बाद आगे की पढ़ाई गुजरात की धरती अहमदाबाद से की, जहां उसके पिता रेलवे में नौकरी करते हैं. वहीं कुश्ती खेल के प्रति ललक की वजह से वह पंजाब में इसका प्रशिक्षण लेने लगीं. मौजूदा समय में वह कर्नाटक से एमबीए की पढ़ाई कर रही है.
पूजा कुमारी ने ईटीवी भारत के साथ की खास बातचीत
गोरखपुर में गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद ईटीवी भारत से बातचीत में उन्होंने कहा कि, ‘कुश्ती के लिए मैट पर उतरने के साथ उसे सिर्फ जीत ही दिखाई देती है. सामने वाला पहलवान उसे दुश्मन की तरह नजर आता है. भले ही उसके भाई और बहन ही प्रतिद्वंदी क्यों ना हो फिर भी उसका लक्ष्य गोल्ड मेडल ही होता है. कॉम्बैट कुश्ती के नियमों की चर्चा करते हुए कोच सुधीर कुमार ने कहा कि, यह शालीनता भारी कुश्ती का खेल है.
उसने अपने इस खेल में परिवार का पूरा सहयोग होना बताया. पिता मनोज कुमार डीआरएम ऑफिस अहमदाबाद में कार्यरत हैं. मां मंजू देवी गृहणी की भूमिका में है. वह सिर्फ दो बहने ही हैं. जिसमें बड़ी बहन लकी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में है. यह रेसलिंग की राष्ट्रीय कोच मोनिका से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है.
पूजा ने साल 2024 में किया शानदार प्रदर्शन
पूजा कहती है कि, वह इंटरनेशनल के साथ साउथ एशियन चैंपियनशिप काठमांडू. मई 2024 में गोल्ड मेडल जीती, तो एशियाई चैंपियनशिप जो अप्रैल 2024 श्रीलंका में हुआ उसमें भी गोल्ड जीता. लड़की होकर दांव पेंच के इस खेल को अपनाने के सवाल पर पूजा कहती है कि, कई खिलाड़ियों से सजी हुई टीम के गेम में सफलता प्राप्त करने के लिए सभी को एकजुट होकर मेहनत करनी पड़ती है. जबकि कुश्ती में सारी दक्षता, योग्यता और निर्णय अकेले पर निर्भर करता है. हम अपनी लड़ाई खुद लड़ते हैं. इसमें करना ही क्या होता है.
कुश्ती के जो दांव पेंच हैं उसको लगाकर पॉइंट्स हासिल होता है. और प्रतिद्वंद्वी पहलवान जब उसके द्वारा इस खेल में पूरी तरह पराजित होता है तो सभी अंकों के आधार पर अधिक अंक वाला विजेता घोषित होता है. वह कहती है कि, शुरुआती कुश्ती में भले ही उसे मात खानी पड़ी हो लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उसे माता-पिता और कोच के आशीर्वाद से सफलता के झंडे गाड़ने में कहीं कोई दिक्कत नहीं आई. गोरखपुर में गोल्ड मेडल हासिल करने के दौरान उसने बिहार की पूनम को पटखनी दी. पूजा कहती है कि अब आगे की लड़ाई उसकी वर्ल्ड चैंपियनशिप की शुरू होने वाली है जो लंदन में आयोजित होगी.
प्रतियोगिता में 400 से अधिक खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा
गोरखपुर में आयोजित हुई इस कुश्ती प्रतियोगिता में 400 से अधिक महिला पुरुष पहलवानों ने हिस्सा लिया जिसमें अधिकांश 18 वर्ष तक के पहलवान थे. 25 वर्ष तक के पहलवानों की संख्या गिनती की थी. 14 वर्ष के राष्ट्रीय चैंपियन ध्रुव कुमार तो अतुल्य कुमार की झोली में भी गोल्ड मेडल ही आया.
अतुल्य इंटरनेशनल खिलाड़ी है और काठमांडू में सिल्वर मेडल प्राप्त कर चुका है. वह कॉम्बैट कुश्ती के नियम कानून को भी बताता और कहता है यह प्यार का गेम है. इनको कोच अजीत सिंह जो एशियाई चैंपियन रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर के कोच हैं. उन्होंने निखारा है. इन सभी खिलाड़ियों की इच्छा इंटरनेशनल चैंपियन तो बनना ही है, लेकिन यह चाहते हैं कि इस खेल को भी ओलंपिक में मौका दिया जाए जिससे वह भारत का नाम वहां पर भी रोशन कर सके.
