दिनांक: 30 अगस्त 2026 – लघु उद्योग दिवस_

_जारीकर्ता: अमर नाथ गामी, पूर्व विधायक हायाघाट-84, दरभंगा (बिहार)_
_संपर्क: 9471006008, 9431286598_

मान्यवर, दुख के साथ आज लघु उद्योग दिवस पर लघु उद्योग की बर्बादी की कहानी साझा कर रहा हूँ।

स्वदेशी बाजार व्यवस्था से खुशहाल था मिथिला। कृषि आधारित उद्योग से कृषि उपज को उचित दाम मिलता था। उपभोक्ता को सस्ता, गुणवत्ता वाला सामान मिलता था। दलहन मूंग, मसूर, खेसारी, तेलहन राय, सरसों, तीसी भरपूर होता था। गेहूँ, मक्का, धान पर निर्भरता कम थी, खाने लायक उपजाते थे। तीसी बंगाल तक जाता था, मसूर-मूंग राज्य से बाहर जाता था।
हर ग्रामीण बाजार में तेल मिल, आटा चक्की, धान कुट्टी, चूड़ा मिल होता था। जिला स्तर पर राइस मिल, दाल मिल, तेल मिल होता था। चीनी मिल, जूट मिल, पेपर मिल को भी कच्चा माल उपलब्ध होता था। 2008 तक जैसे-तैसे मिल चल रहा था, उसके बाद पूर्ववर्ती सरकार की गलत नीति से उद्योग बंद होना शुरू हुआ।
गलत नीति – मौसम खराब, फसल क्षति पर आयात कर बाजार नियंत्रित किया गया। आयात बंद नहीं हुआ, नीति का हिस्सा बन गया।

नॉर्मल मौसम में किसान फसल उपजाया, सरकार ने स्टॉक लिमिट कानून उठा लिया। पूंजीपति, बड़ा घराना, ऑटोमोबाइल सेक्टर से आटा, मैदा, बेसन, चावल, दाल, तेल, घी, ग्रोसरी स्टोर खोल लिया। किसान से सस्ता खरीदा, महंगा बेचा। बड़े को लाभ, छोटा बंद, करोड़ों बेरोजगार, मशीन स्क्रैप।
_सुझाव:
1. पुनः स्टॉक लिमिट कानून लागू हो।
2. दलहन तेलहन पर सब्सिडी, MSP सही हो।
3. सस्ता Rent पर गोडाउन, सरकार गेहूँ-धान की तरह बफर स्टॉक रखे, लघु उद्योग से मिलिंग करवाये।
इससे दो लाख करोड़ विदेशी मुद्रा बचेगी, पचास हजार करोड़ से पेट्रोल, गैस, डीजल, इलेक्ट्रॉनिक सस्ता होगा, करोड़ो रोजगार सृजित होगा.
जो अर्थ व्यवस्था को मजबूती देगा.
स्टॉक लिमिट हटाने और आयात स्थाई करने से क्या फायदा-नुकसान हुआ, इसका जायजा जरूरी है। नये स्टार्टअप ने सब्सिडी ली, आज उनकी क्या स्थिति है, इसका आकलन हो।
बिना नीति बदलाव के सब्सिडी से बर्बादी तय है, युवा भविष्य शुरू होने से पहले खत्म हो जायेगा।

_अमर नाथ गामी_
_पूर्व विधायक, दरभंगा_
