जिसमें 10 किसानों को 1000 बीज प्रति किसान वितरित किया गया। अमूर कार्प प्रजाति मछली के पालन को लेकर क्षेत्र के मछली पालक किसानों के माध्यम से बढ़ावा देना है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि अमूर कार्प प्रजाति कि मछली मुख्य रूप से कॉमन कार्प से ही क्रॉस ब्रीडिंग के माध्यम से विकसित की गयी उन्नत प्रजाति की है।
जिसकी वातावरणीय कारको के प्रभाव को सहन करने कि क्षमता कॉमन कार्प से अधिक होती है। साथ ही इस मछली के पालन में लागत मूल्य भी कम लगता है।
इस मछली को अन्य मछलियो जैसे रोहू कतला मृगांल, कॉमन कार्प, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प के साथ कम्पोजिट फिश कल्चर में आसानी से पाला जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. शर्मा ने मत्स्य किसानों
के समस्याओ के निराकरण हेतु सुझाव दिए एवं प्रशिक्षणर्थियों से मछली पालन को वैज्ञानिक पद्धति से आगे बढ़ाने पर पर ध्यान देने हेतु संवाद किया एवं साथ ही केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री मत्स्य
सम्पदा योजना के माध्यम से लाभ लेकर मछली व्यवसाय को आगे बढ़ाने कि सलाह दी। इसके साथ ही 16 अन्य किसानों को निकरा परियोजना के तहत भी अमूर कार्प बीज वितरित किया गया।
जिसका आयोजन डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक लोकेन्द्र, अमन संजीव, डॉ. चन्दन एवं अन्य कर्मी उपस्थिति थे।





