कार्यशालाएं विद्यार्थियों को रंगमंच की व्यावहारिक समझ प्रदान कर सृजनात्मक क्षमता का करती हैं विकास- प्रो लावण्य कीर्ति
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर संगीत एवं नाट्य विभाग द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय रंगमंचीय कार्यशाला “कहानी और रंगमंच” में प्रतिभागियों ने नाट्य प्रस्तुति की तैयारियों को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए। प्रशिक्षक कुंदन कुमार के मार्गदर्शन में प्रतिभागी आगामी नाटक “कफन” के मंचन हेतु विभिन्न रंगमंचीय पक्षों पर गंभीरतापूर्वक कार्य कर रहे हैं।
कार्यशाला के दौरान नाटक कफन के मंच-विन्यास की रूपरेखा तैयार की जा रही है तथा मंच सज्जा को प्रभावशाली बनाने के लिए आवश्यक सामग्री पर कार्य जारी है। इसके साथ ही नाटक के पात्रों की वेशभूषा को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी चल रही है, ताकि प्रस्तुति पात्रों और परिवेश के अनुरूप दिखाई दे। नाटक में प्रयुक्त होने वाली विभिन्न मंचीय सामग्रियों के निर्माण और चयन के कार्य भी प्रतिभागियों द्वारा किये जा रहे हैं।
इसी क्रम में कलाकारों ने नाटक का पूर्वाभ्यास भी किया, जिसमें संवाद, अभिनय, मंच पर संचरण, दृश्य-संयोजन तथा पात्रों की भावाभिव्यक्ति पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशिक्षक ने प्रतिभागियों को रंगमंच की बारीकियों से अवगत कराते हुए बताया कि एक सफल नाट्य प्रस्तुति केवल अभिनय पर ही नहीं, बल्कि मंच-विन्यास, वेशभूषा, मंचीय सामग्री तथा मंच अनुशासन के समन्वय पर भी निर्भर करती है।
कार्यशाला में प्रतिभागियों का उत्साह निरंतर बढ़ रहा है और सभी आगामी प्रस्तुति को सफल बनाने के लिए पूरे समर्पण के साथ जुटे हुए हैं। विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला की संयोजिका प्रो लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ ने प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों को रंगमंच की व्यावहारिक समझ प्रदान करती हैं तथा उनकी सृजनात्मक क्षमता का विकास करती हैं। आगामी दिवस में नाटक “कफन” के मंचन की तैयारियों को और अधिक गति प्रदान की जाएगी।



