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2 फीट के अर्जुन से मिलिए, दिव्यांग होने के बावजूद बिहार के बच्चों को मुफ्त में कर रहे शिक्षित।

 

2 फीट के अर्जुन जला रहे शिक्षा का अलख: समस्तीपुर जिले के अंगार थाना क्षेत्र के चैता गांव के रहने वाले 2 फीट के ग्रेजुएट अर्जुन दास ने गरीबी और आर्थिक तंगी को काफी करीब से देखा है. खुद नौकरी नहीं कर सके, लेकिन दूसरे बच्चों को इस तरह की समस्या ना हो इसका ध्यान रखते हैं. यही कारण है के आज अपने गांव में ही अर्जुन बेबस और लाचार बच्चों के बीच शिक्षा का अलख जला रहे हैं.

क्लास में पढ़ाते अर्जुन दास

बच्चों को पूरी करनी पड़ती है ये शर्त: आज परमेश्वर दास के छोटे पुत्र अर्जुन दास किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं. गांव के लोग उनको सर कहते हैं. बच्चे उनसे पढ़ाई करने के लिए समय पर क्लास में पहुंच जाते हैं, क्योंकि अर्जुन की शर्त यही है कि पैसे मत दो, लेकिन क्लास पर समय पर आना.

“चार साल से मैं बच्चों को कोचिंग दे रहा हूं. जो बच्चे अनाथ हैं या गरीब हैं तो मैं उन्हें फ्री में ट्यूशन देता हूं. जिनको जो इच्छा है उतना फी दे देता है. मेरी शर्त बस इतनी है कि बच्चे समय पर क्लास आएं.”– अर्जुन दास, शिक्षक

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अर्जुन की नहीं हुई शादी: अर्जुन तीन भाई और तीन बहन हैं. सभी लोगों की शादी हो चुकी है. यह छोटे हैं और 2 फीट के होने के कारण कोई भी लड़की वाले इन्हें अपनी बेटी नहीं देना चाहते हैं. इनके दो बड़े भाई दिल्ली में रहकर मजदूरी करते हैं. पिता परमेश्वर दास गांव में ही खेती बाड़ी कर अपने परिवार का गुजर बसर करते हैं.

निशुल्क कोचिंग की शुरुआत क्यों की? :अर्जुन दास ने बताया कि ग्रेजुएट होने के बाद रेलवे में नौकरी के लिए अप्लाई किया था, लेकिन किन्हीं कारणों से नौकरी नहीं हो सकी. उन्होंने बताया कि उसी दिन प्रण कर लिया कि अपने गांव के दबे कुचले गरीब असहाय बच्चों के बीच शिक्षा की अलख जगाएंगे.

अर्जुन साध रहे अपना लक्ष्य 

अर्जुन दास ने बताया कि जब वह पढ़ाई करते थे तो कोचिंग सेंटर में पढ़ने जाते थे, जहां के डायरेक्टर उदय संकट ठाकुर ने इनकी पढ़ाई करने में काफी मदद की. कोचिंग निशुल्क देते थे.

“जब मैं कोचिंग क्लास करता था तो मेरे एक सर मुझे फ्री में पढ़ाते थे. कॉपी किताब के साथ ही गाड़ी का भाड़ा भी देते थे. उसी दिन मैंने सोच लिया था कि मैं भी बच्चों को फ्री में ज्ञान दूंगा ,ताकि वह अपना भविष्य सवार सके. इसी उद्देश्य से अपने गांव में मैंने कोचिंग की स्थापना की है.”अर्जुन दास, शिक्षक

फ्री में 1-12वीं तक के बच्चों को देते हैं कोचिंग 

क्लास में खचाखच होते हैं बच्चे: अर्जुन एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों बच्चों को अपने कोचिंग में बैठाकर निशुल्क शिक्षा देते हैं. उन्होंने बताया कि शिक्षा देने के बदले बच्चों से कोई भी फीस नहीं लेते हैं. बच्चों के माता-पिता अगर खुश हुए तो कभी-कभार ₹20 से लेकर ₹100 तक उन्हें मदद कर दिया करते हैं.

लोग उड़ाते थे मजाक:अर्जुन दास ने बताया कि वह बैटरी चलित एक साइकिल रखे हुए हैं जिससे वे चलते हैं. पहले तो गांव समाज के लोगों ने दो फीट के ग्रेजुएट युवक अर्जुन दास का खूब मजाक उड़ाया. लेकिन अर्जुन दास उसे दरकिनार करते हुए अपने हौसले की उड़ान को कभी कमने नहीं दिया और आज गांव ही नहीं पूरे अगल-बगल के इलाकों से भी बच्चे उनके कोचिंग में निशुल्क शिक्षा ग्रहण करने आते हैं.

2 फीट के अर्जुन दास 

माता-पिता को है गर्व:पिता परमेश्वर दास एवं उनकी मां मीना देवी का कहना है कि सरकारी सुविधा के नाम पर इन लोगों को सिर्फ 5 किलो अनाज मिलता है. उन्होंने बताया कि उनके बेटे ने निशुल्क बच्चों को पढ़ाकर अपने गांव ही नहीं पूरे जिले में एक अपनी अलग पहचान बना ली है. अर्जुन पर दोनों को नाज है.

“अर्जुन सबसे छोटा है. मेरे तीन लड़के और तीन लड़की है. कोचिंग में फ्री में पढ़ाता है. हमें उसपर नाज है. उसकी शादी नहीं हुई है.”– परमेश्वर दास, अर्जुन के पिता

पिता परमेश्वर दास के साथ अर्जुन दास 

“दिव्यांगता के कारण अर्जुन ने की शादी नहीं की. मेरे पास कुछ भी नहीं है. रोज कमाना और रोज खाना है. सरकार की तरफ से 5 किलो चावल मिलता है.”– मीना देवी, अर्जुन की मां

अर्जुन की आंखों से बच्चे देख रहे सपने: आज अर्जुन दास क्लास एक से लेकर क्लास 12वीं तक के पढ़ने वाले बच्चों के बीच शिक्षा का अलख जगा रहे हैं. वहीं उनके माता-पिता एवं आसपास के लोगों को अर्जुन दास पर नाज है. साथ ही बच्चे भी अपने सर की जमकर तारीफ करते हैं. बच्चों का कहना है कि जो सपना उन्होंने बड़े होकर बनने का देखा है, उसे अर्जुन सर पूरा करने में मदद कर रहे हैं.

“मेरे पापा गरीब हैं. पढ़कर डॉक्टर बनना चाहती हूं. सर बहुत अच्छे से पढ़ाते हैं. कभी भी फीस नहीं लेते हैं. मैं आठवीं कक्षा में पढ़ती हूं.”– मौसम कुमार, छात्रा

“मैं आठवीं में पढ़ता हूं. मैं अर्जुन सर के पास पढ़ने आता हूं. एक साल से यहां पढ़ रहा हूं. सर पैसे नहीं लेते हैं. सौ या दो सौ रुपये कभी-कभी दे देते हैं.”-अंकित कुमार, छात्र

सरकार से मदद की उम्मीद: फिलहाल अर्जुन अपने दम पर बच्चों की किस्मत बदलने में लगे हैं, लेकिन उन्हें भी उम्मीद है कि सरकार उनके बारे में कुछ सोचेगी. अगर सरकार से मदद मिले तो अर्जुन इन बच्चों के सपनों को एक नई और मजबूत पंख दे सकते हैं.

 

 

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