लनामिवि के मनोविज्ञान विभाग में संगोष्ठी आयोजित
दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग द्वारा ‘ सक्सेस थ्रू रेजिलिएंस: पॉजिटिव एप्रोच @ विकसित भारत 2047’ विषय पर एक दिवसीय अकादमिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य विकसित भारत 2047 के परिप्रेक्ष्य में युवाओं में मानसिक दृढ़ता , सकारात्मक सोच एवं लक्ष्य-निर्धारण की भूमिका को रेखांकित करना था। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो मो इंतखाबुर रहमान ने अपने व्याख्यान में सफलता की मनोवैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि सफलता का आशय है, जिसे व्यक्ति अपने जीवन के लिए अर्थपूर्ण समझें । केवल कठिन परिश्रम ही नहीं, बल्कि मासिक दृढ़ता, स्मार्ट लक्ष्य-निर्धारण, आत्म-नियमन एवं सकारात्मक दृष्टिकोण भी सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक अवयव हैं। उन्होंने युवा पीढ़ी से असफलताओं को सीख के रूप में स्वीकार कर आगे बढ़ने का आह्वान किया। प्रो ध्रुव कुमार ने अपने संक्षिप्त वक्तव्य में कहा कि मानसिक दृढ़ता व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में भी संतुलित निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है, जो व्यक्तिगत एवं राष्ट्रीय विकास दोनों के लिए आवश्यक है। विभागीय शिक्षक डॉ. मो ज्या हैदर ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण में मानसिक लचीलापन युवाओं को तनाव और असफलताओं से उबरकर निरंतर आगे बढ़ने की शक्ति देता है। विभागाध्यक्ष प्रो. मनसा कुमारी सुल्तानिया ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए आगत अतिथियों का हार्दिक अभिनंदन किया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन श्री अमृत कुमार झा द्वारा किया गया वहीं सभी के प्रति स्नेहिल धन्यवाद डॉ अनीस अहमद ने किया। इस संगोष्ठी में डॉ. निशात शाहीन एवं डॉ. विजय कुमार दास का आयोजन में उत्साहपूर्वक सहयोग सराहनीय रहा।
संगोष्ठी में विभाग के शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता रही।
लनामिवि के मनोविज्ञान विभाग में संगोष्ठी आयोजित


