तालाब में स्नान कर रवि व्रत का किया शुभारंभ।
जिले भर में महिलाओं ने तालाब में स्नान कर रवि व्रत जिसे सूर्य व्रत भी कहा जाता है उसकी विधिवत शुरुआत किया। मिथिला के परंपरा अनुसार अगहन मास जो अंग्रेजी कैलेंडर नवंबर दिसंबर के समय आता है उसमें रवि व्रत (सूर्य का व्रत) शुरू होता है, जो शुक्ल पक्ष के पहले रविवार से शुरू होकर छह महीने तक चलता है। इस व्रत में सूर्यदेव की पूजा की जाती है और यह चर्म रोग, रक्त विकार से मुक्ति और संतान की सुख-समृद्धि के लिए उत्तम माना जाता है।
इस व्रत में एक दिन पहले नहाय-खाय होता है और अगले दिन रविवार को सूर्य को अर्घ्य देकर, एक बार भोजन किया जाता है। व्रती महिलाएं शनिवार को नहाय-खाय करती हैं। इसके बाद रविवार के लिए पकवान (जैसे खीर, पुड़ी) और पूजा की अन्य सामग्री जैसे ठेकुआ, फल, पान-सुपारी, फूलमाला आदि तैयारी के साथ पूजा अर्चना करती है। इस व्रत में एक बार ही भोजन किया जाता है, जिसमें प्रसाद स्वरूप खीर, फल आदि ग्रहण कर सकते हैं। रविवार को नमक और तामसिक भोजन (मांस, मछली, शराब) का सेवन वर्जित माना गया है।
