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गंगा की लहरों के बीच नाव पर बिना बैंडबाजे के दूल्हा-बाराती, बिहार में बाढ़ में निकली अनोखी बारात।

बलिया से लेकर बिहार के बक्सर जिला में गंगा में आई बाढ़ के बीच एक उत्सवी माहौल देखने को मिला। बाढ़ के बीच ही नाव से बरात लेकर दूल्हा शादी करने दुल्हन के गांव बेयासी पहुंचा।

बाढ़ से बेहाल बिहार 

बिहार में बड़ी नदियों के बाद छोटी नदियों का कहर शुरू हो गया है। सोमवार की शाम तक 13 छोटी नदियां खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गयीं। इसके कारण सात जिलों में स्थिति बिगड़ी है। उधर, दस बड़ी नदियां पहले ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
इससे एक दर्जन से अधिक जिलों में बाढ़ का कहर जारी है। पटना, लखीसराय, भागलपुर और खगड़िया समेत 10 जिले बाढ़ की चपेट में हैं और यहां 17 लाख से अधिक लोग इससे प्रभावित हुए हैं। लेकिन इन सबके बीच ज़िंदगी का जश्न भी बदस्तूर ज़ारी है।

बक्सर में दिखा बाढ़ के बीच अद्भुत नज़ारा

तीन महीने पहले बिहार के बक्सर जिला अंतर्गत नैनीजोर लाल डेरा गांव के रहने वाले कमलेश राम के पुत्र राजेश कुमार की शादी बलिया के बेयासी गांव में तय हुई थी। इस बीच बक्सर का सिमरी दियारा क्षेत्र  गंगा की बाढ़ से घिर गया। शादी की तैयारी दोनों पक्ष की ओर से थी। अचानक बाढ़ ने सारे रास्ते बंद कर दिए। गंगा में आई बाढ़ के कारण सड़क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गए, ऐसे में बारात लेकर जाना मुश्किल हो गया। ऐसे विषम परिस्थिति में परिवार ने नाव से बारात ले जाने का फैसला किया। तब गांव के लोगों ने पहली बार एक अद्भुत नजारा देखा।

नाव पर निकली बारात- ना बैंडबाजा, ना डीजे

गंगौली गांव के पास तटबंध के नीचे से एक सजी-धजी नाव पर बारात निकली। दूल्हा साफा पहने, पारंपरिक पोशाक में नाव पर बैठा था और उसके साथ बाराती भी उसी जोश के साथ मौजूद थे। दो नाव पर 20-25 लोग बारात लेकर निकले। नाव पर कोई डीजे नहीं था, न ही बैंड-बाजा, लेकिन गंगा की लहरों की थपकी और नाविकों की ताल ने माहौल को खास बना दिया।
बारातियों ने भी पूरे जोश में ढोलक की जगह तालियां बजाईं। ग्रामीणों के लिए यह दृश्य अनोखा था। लोगों ने अपने मोबाइल से इस खास बारात की फोटो और वीडियो बनाई और सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह बारात इलाके में चर्चा का विषय बन गई। दूल्हे के पिता कमलेश राम ने बताया कि शादी की तारीख पहले से तय थी और रद्द करना हमारे लिए संभव नहीं था। इसलिए हमने नाव से बारात ले जाने का निर्णय लिया। गंगा मैया की लहरों ने हमारी बारात को यादगार बना दिया। यह शादी हमारे परिवार के लिए हमेशा खास रहेगी।

मुसीबतों में लोग ढूंढ रहे रास्ता

हालांकि, यह सच है कि कुछ लोग, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, बाढ़ को एक सामान्य घटना के रूप में स्वीकार करते हैं और इससे निपटने के तरीके खोजते हैं।
वे अक्सर एक-दूसरे की मदद करते हैं और समुदाय की भावना से काम करते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे बाढ़ से खुश हैं, बल्कि वे परिस्थितियों के अनुकूल होने और जीवित रहने की कोशिश कर रहे हैं। बाढ़ एक गंभीर समस्या है जिसके लिए सरकार और समाज को मिलकर काम करने की आवश्यकता है ताकि लोगों को बाढ़ से बचाया जा सके और उनके जीवन को बेहतर बनाया जा सके।

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