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बिहार बायो फ्यूल पॉलिसी 2025 की हुई शुरुआत, मंत्री बोले- PM मोदी के सपनों को करेगी साकार।

बिहार बायोफ्यूल्स उत्पादन प्रोत्साहन नीति : बिहार सरकार के उद्योग विभाग ने ‘बिहार बायोफ्यूल्स उत्पादन प्रोत्साहन नीति, 2023’ को 2025 में संशोधित कर लागू किया है. यह नीति 100% फ्यूल‑ग्रेड इथेनॉल और CBG/bio‑CNG इकाइयों को लक्षित करती है. वर्तमान में बिहार में 12 इथेनॉल इकाइयां कार्यरत हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 1617.5 किलोलीटर प्रति दिन है.

 

BIADA चयनित औद्योगिक क्षेत्रों में सीबीजी इकाइयों के लिए ओएमसी और निजी आपूर्तिकर्ताओं को 25% औद्योगिक भूमि 30 वर्षों के लिए 75,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर पर पट्टे पर देगा. इस आयोजन के पश्चात बिहार को महत्वपूर्ण निवेश प्राप्त होने की संभावना है, जो राज्य के आर्थिक और पर्यावरणीय विकास को और गति देगा.

पीएम मोदी के विजन में होगा सहायक : बिहार के उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने ईटीवी भारत से फोन पर बातचीत में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि 2070 तक भारत को नेट जीरो करना है यानी कार्बन उत्सर्जन को जीरो करना है. प्रधानमंत्री मोदी के सपनों को साकार करने के लिए बायोफ्यूल्स तेल के संदर्भ में भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा.

बिहार के उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा 

“किसानों के आय में बढ़ोतरी के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर सृजन होंगे. बिहार जैसे राज्य में बायोफ्यूल्स के क्षेत्र में आसीम संभावना है. चाहे एथेनॉल हो या कंप्रेस्ड बायोगैस हो या ग्रीन हाइड्रोजन हो इन सभी क्षेत्र में असीम संभावना है. बिहार सरकार के द्वारा जो नई नीति लाई गई है उससे बायोफ्यूल्स सेक्टर में बिहार को हम एग्री स्थान पर ले जा सकेगें.”-नीतीश मिश्रा, उद्योग मंत्री, बिहार सरकार

हरित ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा : उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा का मानना है कि इस नीति के शुभारंभ हो जाने के बाद इसमें दो चीज प्रमुख है. हम लोग इसको बढ़ावा देने के इंसेंटिव देते हैं, इसके अलावे सीबीजी सेक्टर के लिए निवेशकों को सस्ती कीमत पर जमीन उपलब्ध करवाएंगे, ताकि निवेशक को किसी तरीके से परेशानी ना हो. निवेशकों को सब्सिडी रेट पर बियाडा के थ्रू जमीन उपलब्ध करवाई जाएगी. 75000 प्रति एकड़ प्रतिवर्ष किराया पर निवेशकों को जमीन उपलब्ध करवाई जाएगी.

वेस्ट टू एनर्जी का कॉन्सेप्ट :उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा का मानना है कि बायोफ्यूल्स उत्पादन प्रोत्साहन नीति 2025 का लाभ बिहार के किसानों को भी होगा. कंप्रेस्ड बायोगैस कहीं ना कहीं एग्रीकल्चर अवशेष से ही बनता है. किसानों के वह उत्पादन जो खराब होने लगते हैं जैसे पराली, गोबर एवं अन्य सामान कंप्रेस्ड बायोगैस बनाने में उपयोगी साबित हो रही है.

“बिहार के ग्रामीण क्षेत्र हो या शहरी क्षेत्र यह वेस्टेज किसानों के लिए एवं लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है. उसी को देखते हुए सीवीजी जो एंग्री बेस्ड एवं म्युनिसिपल वेस्ट से बायोगैस का निर्माण होगा. इस अवशेषों के उपयोग में आ जाने से वायु प्रदूषण भी कम होगा. यह अवशेष जो किसानों के लिए कोई काम के नहीं थे उसको किसान के थ्रू लेने पर किसानों की आय में वृद्धि होगी. यह किसानों के लिए एक एडिशनल फंड के रूप में काम आएगा.”नीतीश मिश्रा, उद्योग मंत्री, बिहार सरकार

बिहार को लेकर निवेशकों की रुचि :उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि बिहार सरकार के बायोफ्यूल उत्पादन प्रोत्साहन नीति के कारण बिहार में निवेशकों की रुचि बढ़ी है. कई तेल कंपनियों की तरफ से बिहार में निवेश के प्रस्ताव आए हैं, चाहे वह इंडियन ऑयल हो या एचपीसीएल. एचपीसीएल को बियाडा की तरफ से जमीन का आवंटन किया गया है.

“रिलायंस के अलावा अन्य निजी कंपनियों के भी प्रस्ताव बिहार सरकार को मिले हैं. कंप्रेस्ड बायोगैस के क्षेत्र में बियाडा के थ्रू सीमित जगह के लिए पहले प्रावधान किया गया था. लेकिन अब हम बिहार में लैंड बैंक को बढ़ा रहे हैं. 4-5 हजार एकड़ भूमि बढ़ेगी. उन जमीनों को भी इस प्रोजेक्ट के लिए देंगे. मेरा यह मानना है कि आने वाले दिनों में कंप्रेस्ड बायोगैस के क्षेत्र में बहुत संख्या में निवेशक आएंगे.”– नीतीश मिश्रा, उद्योग मंत्री, बिहार सरकार

कार्यक्रम में शामिल उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री नीतीश मिश्रा एवं अन्य 

प्रमुख बदलाव और संशोधन 2025 : बिहार बायोफ्यूल्स उत्पादन प्रोत्साहन नीति के तहत क्लियरेंस की अंतिम तिथि को 31 मार्च 2027 तक बढ़ाया गया. इसके अलावे वित्तीय स्वीकृति हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च 2028 कर दी गई है.

भूमि लीज की नई व्यवस्था : BIADA के अंतर्गत औद्योगिक जमीन का 25% तक हिस्सा अब CBG यूनिट्स को 30 वर्षों के लिए लीज पर दिया जा सकता है. वार्षिक किराया ₹75,000 प्रति एकड़ तय किया गया है, जिससे लागत स्पष्ट रहती है और निवेश स्थिर होता है.

वित्तीय एवं पूंजीगत प्रोत्साहन : बायोफ्यूल्स उत्पादन प्रोत्साहन नीति के तहत निवेशकों को निवेश पर 15% तक की पूंजी सब्सिडी, राशि में अधिकतम 5 करोड़ तक दी जाएगी. सामाजिक रूप से वंचित वर्गों SC, ST, EBC, महिला उद्यमियों को 15.75% सब्सिडी (₹5.25 करोड़ तक) दी जाएगी, बशर्ते निर्माता संस्था में इन वर्गों की 100% हिस्सेदारी हो.

नीति से कैसे मिलेगा लाभ? : CBG और इथेनॉल के उत्पादन से पेट्रोलियम ईंधनों पर निर्भरता कम होगी, जिससे वायु प्रदूषण में कमी, कार्बन उत्सर्जन में कटौती, और पर्यावरणीय स्थिरता बढ़ेगी.

किसानों को नया आय स्रोत : बिहार बायोफ्यूल्स उत्पादन प्रोत्साहन नीति 2025 किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है. किसानों के कृषि के अवशेष का उपयोग बायोफ्यूल्स उत्पादन के लिए हो सकेंगे. कृषि अवशेष (जैसे पुआल, भूसा, गोबर) अब ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोगी हो जाएंगे, जिससे कृषि आधारित उद्योगों और किसानों की आय में वृद्धि होगी.

रोजगार के नए सृजन : हरित ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा मिलते ही बिहार अपनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ सकता है. इथेनॉल एवं CBG संयंत्रों की स्थापना, संचालन और वितरण नेटवर्कों के निर्माण से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नए रोजगार उत्पन्न होंगा. इस योजना के तहत निवेशकों को सब्सिडी, आसान लीज व्यवस्था, आवेदन‑समय की वृद्धि, और ‘पहले आओ पहले पाओ’ का लाभ मिल सकता है.

नैशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल्स : यह नीति भारत सरकार की नैशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल्स 2018 कार्यक्रम, और केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों का हिस्सा है, जो संयुक्त रूप से भारत को नेट 0 एमिशन की दिशा में आगे बढ़ाने में योगदान करेंगी. वर्तमान में बिहार में 12 इथेनॉल संयंत्र संचालित हैं, जिनका कुल दैनिक उत्पादन लगभग 1,617.5 किलोलीटर है. नई नीति के माध्यम से नए CBG यूनिट्स की संख्या में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, साथ ही स्थानीय उद्योग एवं किसानों को सहयोग मिलेगा.

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