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बिहार में वोटर लिस्ट को लेकर सियासी घमासान: 4.5 करोड़ लोगों के नाम कटने का दावा।

तेजस्वी ने लगाया चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप SIR प्रक्रिया के खिलाफ बिहार बंद, राहुल गांधी समेत INDIA गठबंधन के नेताओं ने किया विरोध प्रदर्शन में हिस्सा

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर जबरदस्त सियासी घमासान मचा हुआ है। राजद नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बुधवार को इस मुद्दे पर बिहार बंद का आह्वान किया, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए। तेजस्वी ने चुनाव आयोग को आड़े हाथों लेते हुए उसे “गोदी आयोग” करार दिया और कहा कि एनडीए सरकार गरीबों, दलितों और प्रवासी श्रमिकों के वोट काटने की साजिश रच रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह सब मोदी, शाह और नीतीश कुमार के इशारे पर हो रहा है।

4.5 करोड़ प्रवासी वोटरों के नाम काटने का आरोप

तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार के लाखों गरीब, दलित, पिछड़ा और अति पिछड़ा समुदाय के लोग रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में काम करते हैं। एनडीए की नीयत उन लगभग 4.5 करोड़ प्रवासी वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाने की है, ताकि चुनाव में सत्ता को फायदा मिल सके। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाना न सिर्फ लोकतंत्र के खिलाफ है, बल्कि यह गरीबों की राजनीतिक हिस्सेदारी पर हमला है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया पूर्वनियोजित है और गरीब तबके की आवाज़ को दबाने की कोशिश है।

राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की साझा उपस्थिति

बिहार बंद के विरोध मार्च में राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, भाकपा नेता डी राजा, दीपांकर भट्टाचार्य, कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, कन्हैया कुमार और संजय यादव जैसे कई बड़े नेता शामिल हुए। मार्च इनकम टैक्स गोलंबर से शहीद स्मारक होते हुए चुनाव आयोग कार्यालय तक निकाला गया। राहुल गांधी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि भारत में लोकतंत्र की रक्षा के लिए ऐसे आंदोलनों की जरूरत है, जहां हर नागरिक की आवाज सुनी जाए और हर वोट का सम्मान हो।

केंद्र सरकार पर भी विपक्ष का सीधा हमला

प्रदर्शन के दौरान सीपीआई महासचिव डी राजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर अमीरों का पक्ष लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार अंबानी और अडानी को संरक्षण देती है, लेकिन गरीबों की अनदेखी करती है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार गरीबों के वोट काटने की रणनीति पर आगे बढ़ती है, तो देशभर में लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति भरोसा खत्म हो जाएगा।

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