पटना:राजधानी पटना से एक अहम और बड़ी खबर सामने आई है. राज्य में तैनात 19858 सिपाहियों के ट्रांसफर के मामले में पटना हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने इन ट्रांसफर पर लगी अंतरिम रोक को हटा दिया है. यह आदेश राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया गया, जिसमें एक्टिंग चीफ जस्टिस आशितोष कुमार की अगुवाई वाली खंडपीठ ने हस्तक्षेप किया. हालांकि, जिन सिपाहियों ने कोर्ट में याचिका दायर की थी. उनके ट्रांसफर पर फिलहाल रोक जारी रहेगी.
हाईकोर्ट ने तबादले पर रोक हटाई: पटना हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार वर्मा ने अमिताभ बच्चन एवं अन्य की ओर से दायर याचिकायों पर सुनवाई की. कोर्ट ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करते हुए हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था. अब इस मामले की सुनवाई गर्मी की छुट्टी के बाद होनी थी.
क्या कहना है वकील का?: अधिवक्ता अवनीश कुमार ने ये याचिकायें दायर की है. अधिवक्ता अवनीश कुमार का कहना है कि पिछले 5 मई को एक साथ 19858 सिपाही का ट्रांसफर एक जिले से दूसरे जिले में कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि बगैर किसी स्थानांतरण नीति के सिपाहियों का तबादला किया गया है, जोकि सही नहीं है. उनका ये भी कहना है कि वर्ष 2022 में पूर्व के ट्रांसफर पॉलिसी को समाप्त कर दिया गया.
ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर सवाल: अधिवक्ता अवनीश कुमार ने कहा कि आज तक कोई नया स्थानांतरण नीति नहीं बनाई गई है, इसके बावजूद 2010 से लेकर 2015 के बीच नियुक्त सिपाहियों का तबादला कर दिया गया. उन्होंने कहा कि बिना किसी निर्धारित प्रक्रिया अपनाए सिपाहियों का ट्रांसफर किया गया है. हजारों सिपाही जिला में कार्यरत हैं, जिनका स्थानांतरण नहीं हुआ है. इस मामले पर आगे सुनवाई होगी.
19858 सिपाहियों का तबादला:उनका कहना था कि बगैर किसी स्थानांतरण नीति के सिपाहियों का स्थानांतरण किया गया है. उनका यह भी कहना है कि वर्ष 2022 में पूर्व के स्थान्तरण नीति को समाप्त कर दिया गया. उन्होंने कहा कि पुलिस मुख्यालय ने इनको 15 दिनों के अंदर हर हाल में विरमित करने का आदेश दिया है. खास बात ये है कि जिन सिपाहियों को हाल में उच्चतर प्रभार मिला था, उनका भी ट्रांसफर किया गया है.
किन जिलों के कांस्टेबल का ट्रांसफर?:तबादले की सूची में पटना के अलावे नालंदा, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, भोजपुर, वैशाली, बक्सर और चंपारण समेत अन्य जिले भी शामिल हैं. आदेश में अंगरक्षक के रूप में प्रतिनियुक्त ऐसे सिपाहियों का तबादला प्रतिनियक्ति अवधि तक स्थगित रहेगा. प्रतिनियक्ति समाप्त होने के बाद वे संबंधित जिले से कार्यमुक्त हो जाएंगे.





