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वकील को एक महीने की जेल,पत्नी को नहीं दिया खर्च:2016 से 7.72 लाख का बकाया।

समस्तीपुर फैमिली कोर्ट ने अधिवक्ता मनीष कुमार को 1 महीने की सजा सुनाई है।फैमिली कोर्ट के विशेष न्यायाधीश संजय अग्रवाल ने वकील मनीष कुमार को पत्नी प्रीति राज को गुजारा-भत्ता नहीं देने के कारण जेल भेज दिया।

दरअसल, फैमिली कोर्ट ने अधिवक्ता मनीष को 2016 में आदेश दिया था कि वह अपनी पत्नी को भरण पोषण के लिए हर महीने 6 हजार रुपए देंगे, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इस आदेश के उल्लंघन पर कोर्ट ने सजा सुनाई है।

वहीं 9 सालों में गुजारा-भत्ता की रकम करीब 7 लाख 72 हजार हो चुकी है। अगर अधिवक्ता इसकी भरपाई नहीं करते हैं तो उनकी सजा बढ़ाई जा सकती है।

2009 में रॉन्ग नंबर से वकील मनीष और प्रीति के बीच बातचीत शुरू हुई, फिर 2010 में दोनों ने परिवार की सहमति से शादी की थी।

2009 में रॉन्ग नंबर से वकील मनीष और प्रीति के बीच बातचीत शुरू हुई, फिर 2010 में दोनों ने परिवार की सहमति से शादी की थी। (पुरानी तस्वीर)
रॉन्ग नंबर से शुरू हुई थी बात, फिर की शादी

अधिवक्ता की पत्नी प्रीति राज का कहना है-

हम दोनों के बीच 2009 में रॉन्ग नंबर के जरिए बातचीत शुरू हुई थी। इसके बाद धीरे-धीरे हम दोनों करीब आए और 2010 में शादी कर ली। दोनों परिवार की सहमति से शादी हुई थी। 2012 में बेटी हुई। इसके बाद ससुरालवालों ने विरोध करना शुरू कर दिया। इसके बाद हम दोनों समस्तीपुर के काशीपुर मोहल्ला में किराए के मकान में रहने लगे। बाद में पति मनीष कुमार की दो-तीन लड़कियों से प्रेम प्रसंग की खबर मिली। इसके बाद वो मुझसे अलग रहने लगे।

9 साल में 7 लाख 72 हजार का बकाया

प्रीति ने बताया कि- ‘मैंने 2013 में कोर्ट में गुजारा भत्ते के लिए केस किया। 2016 में कोर्ट से मुझे और बेटी के भरण पोषण के लिए हर महीने 6 हजार रुपए देने का निर्देश दिया, लेकिन कोर्ट के आदेश के बावजूद आजतक एक रुपया नहीं मिला। 9 साल बाद भरण पोषण की रकम 7 लाख 72 हजार रुपए बकाया है।’

पत्नी ने कहा कि- ‘मनीष, सीतामढ़ी जिले के डुमरा कैलाशपुरी मोहल्ले के वार्ड नंबर 39 में रहते हैं। 2010 से 2013 तक हमदोनों साथ थे। इसके बाद भी वो छिप-छिप कर मिलने आते थे। 2022 तक कभी-कभी सिर्फ बेटी से मिलने आते थे। लेकिन पैसे कभी नहीं दिया ।

 

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