Featured

बिहार  :  ‘गोली लगने के बाद भी आतंकियों को मार गिराया’, बिहार के पुनीत कुमार को मिलेगा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 

सीआईएसएफ जवान पुनीत कुमार

नालंदा:बिहार के मोकामा निवासी सीआईएएसएफ जवान पुनीत कुमार को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिया जाएगा. 10 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू CISF स्थापना दिवस के मौके पर सम्मानित करेंगी.

साहस के लिए मिलेगा पुरस्कार: यह पुरस्कार पुनीत को उस साहस के लिए दिया जाएगा, जिस वक्त गोली लगने के बाद भी आतंकियों को मार गिराया था और अपने साथ मौजूद जवानों की रक्षा की थी. ईटीवी भारत से बातचीत में पुनीत कुमार ने उस मंजर को बताया जब चारों ओर से जवानों पर फायरिंग होने लगी थी.

सीआईएएसएफ जवान पुनीत कुमार से बातचीत

वह खतरनाक सुबह: पुनीत बताते हैं कि वह खतरनाक मंजर 22 अप्रैल 2022 को सुबह 4:30 का था. दरअसल, घटना से एक दिन पहले 21 अप्रैल की रात जम्मू के सुजावां चेक पोस्ट पर जवानों की ड्यूटी लगी थी. पूरी रात ड्यूटी करने बाद अगली सुबह 22 अप्रैल को कैंप जाना था. जैसे ही गाड़ी जवानों को लेने के लिए रूकी आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी.

“उस पल को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है. बहुत की खतरनाक मंजर था. जैसे ही गोलीबारी शुरू हुई हमलोगों ने मोर्चा ले लिया. आतंकी गोली और यूबीजीएल (Under Barrel Grenade Launcher) जो एके-47 से चलाया जाता है, उससे हमला कर रहे थे.”-पुनीत कुमार, सीआईएसएफ जवान

पुनीत को सम्मानित करते गांव के लोग 

पहला आतंकी हमला का सामना: पहले तो सभी हैरान हो गए, क्योंकि जवानों के लिए यह पहला आतंकी हमला था. लेकिन ट्रेनिंग में सिखाए गए तरीकों से सभी ने मोर्च लिया. कार्रवाई करते हुए सारे आतंकियों को मार गिराया. इस दौरान पुनीत के हाथ में गोली भी लगी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और ढूंढ ढूंढ़कर आतंकियों को मार गिराया. करीब ढाई घंटे कर यह ऑपरेशन चला था.

10 जवानों को गैलेंट्री अवार्ड: इस हमले में एक एएसआई शंकर प्रसाद पटेल शहीद हो गए थे. पुनीत ने बताया कि इस बात का हमलोगों को काफी दुख है. खुशी भी है कि 10 जवानों को गैलेंट्री अवार्ड के लिए चयन किया गया. 10 मार्च को राष्ट्रपति के द्वारा वीरता पुरस्कार दिया जाएगा.

दादा, चाचा और भाई पुलिस में: बता दें कि पुनीत कुमार मूल रूप से पटना से 95 किमी दूर मोकामा के शिवनार गांव के रहने वाले हैं. पिता सरोज सिंह LIC एडवाइजर हैं. पुनीत सबसे छोटे हैं. इनके भाई चाचा भी झारखंड पुलिस में हैं. दादा बिहार पुलिस थे. शायद इसलिए इन्होंने डिफेंस में जाने की ठानी और आज सीआईएसएफ जवान के तौर पर सेवा दे रहे हैं.

परिवार के साथ पुनीत कुमार 

2015 में सीआईएसएफ में भर्ती: पुनीत बताते हैं कि ननिहाल बड़हिया में स्कूल की पढ़ाई करने के बाद बाढ़ कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. इसी दौरान एसएससी जीडी की परीक्षा दी थी. 2015 में पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त की. उनकी पहली पोस्टिंग हवलदार के पद पर जम्मू कश्मीर में हुआ था. भिलाई से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद दिल्ली मेट्रो में भी योगदान दे चुके हैं. अभी दो साल से मध्यप्रदेश के GAIL ऑथोरिटी प्लांट में आरक्षक के पद पर तैनात हैं.

“वर्दी का शौक शुरू से रहा, क्योंकि घर में दादा, बिहार पुलिस व चाचा और एक कजिन भाई झारखंड पुलिस में हैं. उनसे ही प्रेरणा मिली थी.”-पुनीत कुमार, सीआईएसएफ जवान

न्यूज चैनल से हमले की जानकारी मिली: पुनीत की मां नूतन देवी और पिता सरोज सिंह बेटे की उपलब्धि से काफी खुश हैं. पिता बताते हैं कि सुबह-सुबह जब न्यूज चैनल खोला तो घटना की जानकारी मिली. इसके बाद अपने दामाद को फोन किया. दामाद भी सीआईएसएफ में तैनात है. दोनों की नौकरी साथ साथ हुई थी.

“दामाद से जानकारी मिली कि आतंकी हमला हुआ. पुनीत कुमार सुरक्षित है. सुजावां चेकपोस्ट पर ड्यूटी के दौरान हमला किया गया था. अब राष्ट्रपति के द्वारा सम्मानित किया जाएगा. हमलोग पूरा परिवार इस सम्मान समारोह में शामिल होंगे.”-सरोज सिंह, पुनीत के पिता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *