गुनिया देवी, जो सोनबरसा कचहरी थाना क्षेत्र के धकजड़ी वार्ड 11 की निवासी थीं, 13 जनवरी को ठंड से बचने के लिए अलाव के पास सो रही थीं। इसी दौरान उनकी रजाई में आग लग गई, जिससे वे गंभीर रूप से झुलस गईं। परिजन उन्हें तुरंत सहरसा सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। परंतु, कथित चिकित्सकीय लापरवाही के कारण गुरुवार की रात उनका निधन हो गया।
परिजनों और RJD MLC का हस्तक्षेप
घटना की गंभीरता को देखते हुए कोशी क्षेत्र के राजद एमएलसी डॉ. अजय कुमार सिंह अस्पताल पहुंचे। उन्होंने इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक से मामले की जानकारी मांगी, लेकिन उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। चिकित्सक ने सिविल सर्जन का नंबर देने से भी इनकार कर दिया।
ड्यूटी में गड़बड़ी का खुलासा
जांच में यह पाया गया कि इमरजेंसी ड्यूटी रोस्टर के अनुसार डॉ. निलेश की ड्यूटी होनी चाहिए थी, लेकिन उनकी जगह डॉ. शालिक अख्तर ड्यूटी पर थे। एमएलसी ने इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की है और दोषी चिकित्सकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
सहरसा सिविल सर्जन डॉ. के.के. मिश्रा ने कहा कि मामला संज्ञान में लिया गया है और जांच की जाएगी। दोषियों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। यह मामला सहरसा सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। चिकित्सकीय लापरवाही के ऐसे मामलों से न केवल मरीजों की जान खतरे में पड़ती है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में आम जनता का विश्वास भी कमजोर होता है।
इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया है। परिजनों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले में शीघ्र और ठोस कदम उठाएगा।





