बिहार के सबसे अमीर प्रत्याशी, अरबों में संपत्ति, हैरान कर देगी पत्नी की पूंजी।
सबसे अमीर प्रत्याशी, 170 करोड़ की संपत्ति का दावा:कुमार प्रणय ने अपने शपथ पत्र में चल और अचल संपत्ति को मिलाकर कुल 170 करोड़ रुपये (लगभग 1.70 अरब) की संपत्ति घोषित की है. यह आंकड़ा किसी छोटे-मोटे उद्योग समूह के वार्षिक टर्नओवर से कम नहीं है. उनकी चल संपत्ति, जिसमें नकद, बैंक जमा, शेयर और अन्य निवेश शामिल हैं, का सकल मूल्य 83.35 करोड़ रुपये है. वहीं, अचल संपत्ति में कृषि एवं गैर-कृषि भूमि के साथ इमारतें शामिल हैं, जिनका वर्तमान बाजार मूल्य 86.65 करोड़ रुपये आंका गया है.
इसके विपरीत, उनकी पत्नी की घोषित चल संपत्ति मात्र 132 रुपये है. यह विपरीत छोर वाला आंकड़ा किसी फिल्मी पटकथा जैसा लगता है, जहां पति करोड़ों में खेल रहे हैं और पत्नी के पास नाममात्र की पूंजी. एडीआर की रिपोर्ट में पहले चरण के 1,303 उम्मीदवारों में 519 (40 प्रतिशत) करोड़पति हैं, लेकिन कुमार प्रणय का दबदबा बेजोड़ है.
पांच सालों में दोगुनी से अधिक हुई आय:कुमार प्रणय की संपत्ति के साथ उनकी आय का ग्राफ भी ऊपर की ओर चढ़ा है. शपथ पत्र के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 में उनकी आय 4.36 लाख रुपये थी, जो 2024-25 में बढ़कर 10.75 लाख रुपये हो गई. यानी, मात्र पांच वर्षों में आय में 146 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है. यह आंकड़ा दर्शाता है कि मुंगेर के यह राजनेता न केवल जमीन पर मजबूत हैं, बल्कि वित्तीय पटल पर भी नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं. एडीआर के अनुसार, बिहार में औसत उम्मीदवार की संपत्ति 3.26 करोड़ रुपये है, लेकिन प्रणय जैसे धनकुबेर उम्मीदवार राज्य की राजनीति को नया रंग दे रहे हैं.
बिहार के अन्य धनकुबेर उम्मीदवार: कुमार प्रणय के अलावा बिहार चुनाव 2025 में कई अन्य अमीर प्रत्याशी मैदान में हैं. एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे चरण के अमीरों में मोकामा से अनंत सिंह (लगभग 70 करोड़ रुपये) तीसरे स्थान पर हैं, जो 2020 में भी टॉप पर थे. बेलागंज से जेडीयू की मनोरमा देवी (69 करोड़ रुपये) महिलाओं में सबसे अमीर हैं, जिनकी संपत्ति मुख्य रूप से रियल एस्टेट और कृषि भूमि पर टिकी है. अन्य प्रमुख नामों में नालंदा से कौशलेन्द्र कुमार (कांग्रेस, 30 करोड़ रुपये) और कोरहा से कविता देवी (2.9 करोड़ रुपये) शामिल हैं. सबसे गरीब उम्मीदवारों में दरभंगा से मोजाहिद आलम और पटना से शत्रुधन वर्मा (प्रत्येक के पास मात्र 1,000 रुपये) हैं.
मुंगेर सीट पर चारकोना मुकाबला: एक ओर जहां कुमार प्रणय की संपत्ति सुर्खियां बटोर रही है, वहीं मुंगेर सीट का इतिहास अस्थिरता से भरा पड़ा है. 2010 में जेडीयू के अनंत कुमार सत्यार्थी जीते, 2015 में आरजेडी के विजय कुमार ‘विजय’ ने 2.6 प्रतिशत अंतर से बाजी मारी और 2020 में बीजेपी के प्रणव कुमार (अब कुमार प्रणय) ने मात्र 1,244 वोटों (0.8 प्रतिशत) के फासले से जीत हासिल की. इस बार चारकोना जंग माना जा रहा है. एनडीए से कुमार प्रणय का मुकाबला महागठबंधन के आरजेडी प्रत्याशी अविनाश कुमार विद्यार्थी से है, जिन्हें 2020 में हार का सामना करना पड़ा था. जन सुराज पार्टी के संजय कुमार सिंह, जो जिला परिषद सदस्य रह चुके हैं, तीसरे खंभे के रूप में उभर रहे हैं. स्वतंत्र उम्मीदवारों की मौजूदगी के साथ जातीय समीकरण (यादव, भूमिहार, कोइरी) और स्थानीय मुद्दे जैसे बाढ़ प्रबंधन व विकास कार्य निर्णायक होंगे.
कोई आपराधिक केस नहीं:संपत्ति के इस पहाड़ के सामने कुमार प्रणय की आपराधिक पृष्ठभूमि पाक-साफ है. उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है. एडीआर के अनुसार, पहले चरण में 30 प्रतिशत उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले हैं, लेकिन प्रणय का रिकॉर्ड बेदाग है. हालांकि, मुंगेर की यह सीट हमेशा अप्रत्याशित साबित हुई है और 6 नवंबर को होने वाले मतदान में वोटरों का फैसला सबको चौंका सकता है. बिहार चुनाव की यह जंग न केवल धन-दौलत की, बल्कि राजनीतिक चातुर्य की भी परीक्षा लेगी.
