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मधुबनी : बेमौसम बारिश ने बढ़ाई धुकधुकी, सुगरवे नदी के पानी से बाढ़ का खतरा

स्थानीय लोगों के अनुसार, वे हर वर्ष बाढ़ की चपेट में आते हैं. बाढ़ के दौरान सबसे अधिक समस्या सड़क मार्ग की होती है.

मधुबनी: बेमौसम बाढ़ से प्रभावित इस गांव को पलार नाम दिया गया है. यह मधुबनी जिलांतर्गत अंधराठाड़ी प्रखंड के उत्तरी पंचायत में स्थित है. यहां की आबादी तकरीबन 1500 है. इस गांव के बीचो-बीच होकर सुगरवे नदी अपना रास्ता बनाती है. स्थानीय लोगों के अनुसार, वे हर वर्ष बाढ़ की चपेट में आते हैं. बाढ़ के दौरान सबसे अधिक समस्या सड़क मार्ग की होती है. हल्के पानी की वजह से रास्ता अवरुद्ध हो जाता है, जिससे स्थानीय लोगों को बाजार जाने या नियमित खरीदारी के लिए भी 4 किलोमीटर की अधिक दूरी तय करनी होती है.

क्या है पूरी कहानी:
मधुबनी शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर जब हम इस गांव में पहुंचे, तो यहां के खेत-खलिहानों में बेतहाशा पानी प्रवेश कर चुका था. पानी धीरे-धीरे मुख्य मार्ग के ऊपर बहने की कगार पर था. स्थानीय लोगों के मुताबिक, अगले कुछ घंटों में यह पानी मुख्य मार्ग को अवरुद्ध कर सकता है. हमने जिज्ञासावश उनसे पूछने की कोशिश की कि बेमौसम आए इस पानी का क्या मतलब है. लोगों ने प्रतिक्रिया में कहा कि सुगर्वे नदी के ऊपर बने फाटक को जब खोल दिया जाता है, तो ऐसी घटनाएं सामने आती हैं.

फाटक खोले जाने की वजह किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने से है. लेकिन स्थानीय लोग कहते हैं कि वाटर रिसोर्स और केनाल (अलग डेम) की व्यवस्थाएं बहुत बेहतर नहीं की गई हैं, जिससे एक इलाके के किसानों को फ़ायदा तो होता है लेकिन दूसरी जगह नुकसान भी होता है. जैसे हमारा ही देख लीजिए.

क्या कहते हैं इंजीनियर:
हमने जल संसाधन विभाग के जूनियर इंजीनियर बाल्मिकी से बात करने की कोशिश की, लेकिन हमारा संपर्क नहीं हो पाया. ऐसी परिस्थिति में सिंचाई विभाग के इंजीनियर ब्रजेश निराला से हमने बातचीत की. ब्रजेश इससे पूर्व भी हमें डेम, वाटर रिसोर्स और केनाल संबंधित बातें बता चुके थे. लिहाजा उन्होंने इसे जारी रखते हुए कहा कि झंझारपुर में किसानों की मांग थी कि उन्हें खेती के लिए पर्याप्त पानी मिल सके. उनके पास मिली जानकारी के मुताबिक, झंझारपुर के अररिया संग्राम स्थित सुगरवे नदी पर बने फाटक से केनाल को किसानों के खेत की तरफ मोड़ दिया गया, ताकि उन्हें पानी मिल सके. अब इस वजह से पलार गांव में क्या परेशानी आई है, यह बता पाना मुश्किल है.

यहां के खेतों में पानी अधिक था. यदि एक साधारण 5.5 फीट कदकाठी के इंसान से तुलना करें तो हम कह सकते हैं कि पानी उसके कमर से थोड़ा अधिक ही रहा होगा, जिसके और बढ़ने की प्रबल संभावना थी. वहीं मिली जानकारी के मुताबिक, नेपाल के तराई क्षेत्रों में भारी बारिश की वजह से पानी छोड़े जाने की बात सामने आई है. दूसरी ओर, जब थोड़ी दूरी और हमने तय की, तो देखा स्थानीय लोगों के घरों के चारों ओर पानी प्रवेश कर चुका है जो पक्के मकान के निचले बॉर्डर तक पहुंच गया है.

पास में ही सुगरवे नदी का पुल है, जिसके नीचे रहने वाली तकरीबन 20 से अधिक परिवारों के बांस और फूस वाले घरों में पानी प्रवेश कर चुका है. पास में एक सरकारी विद्यालय है जिसके मुहाने पर पानी आ चुका है, संभवतः आने वाले कुछ घंटों में विद्यालय के अंदर भी पानी प्रवेश कर जाए. इधर लोगों की चिंता मुख्य मार्ग की थी, सड़क पर पानी चलने से लोगों का रास्ता अवरुद्ध हो जाता है और वे वैकल्पिक रास्ते से जाने को विवश हो जाते हैं, जिसके कारण मिनटों का सफर घंटों में तब्दील हो जाता है.

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