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सीताराम नाम जप महायज्ञ में जुट रहें हैं श्रद्धालु ।

जाले। प्रखंड क्षेत्र के भमरपुरा गांव में आयोजित 10 दिवसीय सीताराम नाम जप महायज्ञ में हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है।

संत श्री बासुदेव दास फलाहारी बाबा के निर्देशन में आयोजित महायज्ञ के 121 कीर्तन कुंज से अनवरत सीताराम नाम जाप की गूंज से वातावरण गूंजाए मान हो रहा है।

21 एकड़ में आयोजित महायज्ञ के विशाल मंडप की श्रद्धालु अनवरत प्रदक्षिणा कर रहे है। महायज्ञ के चौथे दिन वृंदावन से पधारे आचार्य श्री भागवत जी महाराज ने रविवार को अपने प्रवचन में श्रीमद् भागवत पुराण के वामन अवतार के प्रसंग को कहा। व्यास गद्दी से उन्होंने

सैकड़ो श्रद्धालुओं से खचाखच भरे पंडाल को संबोधन करते हुए कहा कि माता-पिता की आज्ञा सर्वोपरि है, जैसे ध्रुव ने माता के कहे अनुसार वन में जाकर तप किया और भगवान को पा लिया। इस कथा से आपको यह शिक्षा मिलती है कि माता-पिता अपनी पुत्र पुत्री को अच्छी आचार विचार एवं गुरु से शिक्षा दें।

आगे श्री भागवत आचार्य जी ने बताया कि सत्य सनातन धर्म ही सर्वोपरि है, शास्त्र कहते हैं कि अपने धर्म के लिए मर जाना श्रेष्ठ है, लेकिन दूसरे के धर्म को स्वीकार करना दुखदायक कहा गया है। इसी प्रसंग में उन्होंने कहा कि व्यक्ति के बिगड़ने के चार साधन है।

एक सुंदर रूप मिल जाना दूसरा अत्यधिक यौवन मिल जाना तीसरा अधिक संपत्ति मिल जाना चौथा अयोग्य को अनायास कोई ऊंचा बड़ा पद मिल जाना। आचार्य भागवत जी महाराज ने आज की कथा में कहा की जो भी हमारे सनातन धर्म एवं साधु संत ब्राह्मणों के प्रति एवं वेदशास्त्रों के प्रति व गौ माता के प्रति द्वेष भावना रखता है, शास्त्र कहता है कि उसके विनाश के दिन नजदीक आ चुके हैं।

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