मुख्य वक्ता के रूप में पं. दीनदयाल उपाध्याय गर्ल्स डिग्री कॉलेज, सेवापुरी, वाराणसी की सहायक प्राचार्य डॉ सुधा तिवारी जुड़ीं। उन्होंने शोध समस्या का चयन, परिकल्पना निर्माण, शोध प्रारूप, आंकड़ों का संकलन एवं विश्लेषण तथा शोध रिपोर्ट लेखन की प्रक्रिया को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया। डॉ तिवारी ने कहा कि _“गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए जिज्ञासा, धैर्य और नैतिकता तीन मूल आधार हैं। साहित्य पुनरावलोकन के बिना कोई भी शोध अधूरा है।”_
कार्यक्रम का सफल संचालन विभाग की संकाय सदस्य डॉ प्रगति ने किया। अंत में डॉ प्राची मरवाहा ने मुख्य वक्ता, अध्यक्ष एवं सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यशाला में विभाग की वरिष्ठ संकाय सदस्य उषा झा, प्रीति पीटर, सुषमा गुप्ता, गैर-शैक्षणिक कर्मचारीगण एवं एम.ए. द्वितीय व चतुर्थ सेमेस्टर के लगभग 100 विद्यार्थी ऑनलाइन उपस्थित रहे।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ दिव्या रानी हांसदा ने कहा कि _“शोध ही किसी भी विषय की आत्मा है। ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों को सामाजिक समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान खोजने हेतु प्रेरित करती हैं।”_
कार्यशाला काफी ज्ञानवर्धक एवं अति प्रेरणादायक रही।





