विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग में पद्मश्री पंडित रामचतुर मलिक की 124वीं जयंती समारोह आयोजित

ध्रुपद की प्रस्तुतियों से गूंजा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा का संगीत एवं नाट्य विभाग

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग, ललित कला संकाय में आज पद्मश्री पंडित रामचतुर मल्लिक चेयर के अंतर्गत महान ध्रुपद गायक पद्मश्री पंडित रामचतुर मल्लिक की 124वीं जयंती समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत की समृद्ध ध्रुपद परंपरा को याद करते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विभागाध्यक्ष, विभागीय सभी शिक्षकों एवं विशिष्ट अतिथि पंडित संगीत मल्लिक द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। विभागाध्यक्ष सह संकायाध्यक्ष प्रो लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए पंडित रामचतुर मल्लिक के संगीत योगदान और ध्रुपद परंपरा में उनके महत्त्वपूर्ण स्थान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महान कलाकारों की कला-साधना और उनकी संगीत परंपरा नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

इस अवसर पर पंडित रामचतुर मल्लिक के प्रपौत्र पंडित संगीत मल्लिक ने ध्रुपद गायन की मनोहारी प्रस्तुति दी। उन्होंने राग भीमपलासी में नोम-तोम के आलाप के साथ तार-तार में ध्रुपद की प्रस्तुति की, जिसके बोल थे-“कासे कहूँ जिया की बात”, तथा सूलताल में “शंभू हर हर गंगाधर” की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति में ध्रुपद की गंभीरता, शास्त्रीयता और गायकी की सुंदर झलक देखने को मिली।
इसके पश्चात् संगीत विभाग की छात्राओं ने सहायक प्रोफेसर पुष्कर आनंद के मार्गदर्शन में राग भैरव में ध्रुपद-गायन की प्रस्तुति की। छात्र-छात्राओं की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बना दिया तथा ध्रुपद की परंपरा को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में विभाग के प्रयास को दर्शाया। कार्यक्रम में सहायक प्रोफेसर डॉ पुष्कर कुमार झा, डॉ अभिषेक स्मिथ, रवीन्द्र कुमार सिंह सहित विभाग के अन्य कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

समारोह के माध्यम से पद्मश्री पंडित रामचतुर मलिक की संगीत साधना, उनकी विरासत और ध्रुपद परंपरा में उनके अमूल्य योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
