Friday, July 3, 2026
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घुटना बदलना नहीं, घुटने को बचाना’ थीम पर एस.एन. सर्राफ हॉस्पिटल में 5 जुलाई को लाइव आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी कार्यशाला.

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दरभंगा, 2 जुलाई। उत्तर बिहार में आधुनिक अस्थि रोग एवं स्पोर्ट्स इंजरी उपचार को नई दिशा देने की दिशा में एस.एन. सर्राफ हॉस्पिटल द्वारा 5 जुलाई 2026 को लाइव आर्थ्रोस्कोपी (दूरबीन विधि) द्वारा एसीएल (ACL) लिगामेंट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष कार्यशाला की थीम “जॉइंट प्रिज़र्वेशन (Joint Preservation)” रखी गई है, जिसका मूल संदेश है— “घुटना बदलना नहीं, घुटने को बचाना।”

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कार्यक्रम के दौरान देश एवं प्रदेश के ख्यातिप्राप्त आर्थ्रोस्कोपी विशेषज्ञ लाइव सर्जरी का प्रदर्शन करेंगे, जिससे बिहार एवं आसपास के राज्यों से आने वाले अस्थि रोग विशेषज्ञों और युवा चिकित्सकों को आधुनिक तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण प्राप्त होगा।

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यह महत्वपूर्ण आयोजन इंडियन आर्थ्रोस्कोपी सोसाइटी, बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन, मिथिलांचल ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन एवं एस.एन. सर्राफ हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अमूल्य कु. सिंह,( अध्यक्ष, बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन), डॉ. राकेश कुमार, (अध्यक्ष, बिहार आर्थ्रोस्कोपी सोसाइटी एवं विभागाध्यक्ष पीएमसीएच, पटना), डॉ. एस. एन. सर्राफ, (निदेशक, एस.एन. सर्राफ हॉस्पिटल), तथा डॉ. आर. बी. खेतान, (अध्यक्ष, मिथिलांचल ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन), अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. एस. एन. सर्राफ ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा का उद्देश्य केवल बीमारी का उपचार करना नहीं, बल्कि मरीज के प्राकृतिक अंगों एवं जोड़ों को अधिक से अधिक सुरक्षित रखना भी है। उन्होंने कहा कि आज के समय में घुटने की समस्या होने पर कई मरीजों को सीधे घुटना प्रत्यारोपण (Knee Replacement) की सलाह दे दी जाती है, जबकि आधुनिक आर्थ्रोस्कोपी तकनीक की सहायता से अनेक मरीजों में घुटने के प्राकृतिक जोड़ को सुरक्षित रखते हुए क्षतिग्रस्त लिगामेंट का सफल पुनर्निर्माण (Ligament Reconstruction) किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि “हमारा प्रयास घुटना बदलना नहीं, बल्कि घुटने को बचाना है। यदि मरीज समय पर सही विशेषज्ञ से उपचार कराए, तो कई मामलों में घुटना प्रत्यारोपण की आवश्यकता को टाला जा सकता है। यही ‘जॉइंट प्रिज़र्वेशन’ की मूल भावना है।”

डॉ. रवि कुमार ने बताया कि आर्थ्रोस्कोपी दूरबीन आधारित अत्याधुनिक सर्जरी तकनीक है, जिसमें छोटे चीरे के माध्यम से ऑपरेशन किया जाता है। इस तकनीक से मरीज को कम दर्द होता है, रक्तस्राव कम होता है, संक्रमण की संभावना न्यूनतम रहती है तथा मरीज कम समय में अपने सामान्य जीवन एवं कार्यों में वापस लौट सकता है। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य केवल चिकित्सकों को प्रशिक्षित करना ही नहीं, बल्कि समाज में यह जागरूकता फैलाना भी है कि हर घुटने की समस्या का समाधान घुटना बदलना नहीं होता।

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि खेल के दौरान लगी चोट, सड़क दुर्घटना या अन्य कारणों से यदि घुटने में बार-बार दर्द, सूजन, अस्थिरता या चलने में परेशानी हो रही हो, तो समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। सही समय पर उपचार से प्राकृतिक घुटने को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

इस अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. एस. एन. सर्राफ, डॉ. अभिषेक सर्राफ, डॉ. प्रियंका भारती सर्राफ, डॉ. एस. के. ठाकुर, डॉ. पंकज, डॉ. ज्ञान, डॉ. आर. बी. खेतान, डॉ. रमाशिष यादव, डॉ. प्रवीण, डॉ. अभिषेक घावलकर सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि यह आयोजन केवल एक चिकित्सा कार्यशाला नहीं, बल्कि उत्तर बिहार में आधुनिक आर्थ्रोस्कोपी एवं स्पोर्ट्स इंजरी उपचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम के माध्यम से क्षेत्र के मरीजों को यह संदेश दिया जाएगा कि आधुनिक चिकित्सा में अब “जॉइंट प्रिज़र्वेशन” अर्थात प्राकृतिक जोड़ को सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। अस्पताल ने घुटने , कंधे एवं रीढ़ की नसें की लिगामेंट संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीजों से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लें।

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