Wednesday, June 10, 2026
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रंगमंचीय गतिविधियों का भव्य आयोजन : कार्यशाला एवं नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

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दरभंगा, 09 जून 2026 ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर संगीत एवं नाट्य विभाग, ललित कला संकाय द्वारा चतुर्थ सेमेस्टर (सत्र 2024-26) के विद्यार्थियों के लिए एक विशेष रंगमंचीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजिका प्रो लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में रंगमंच और अभिनय की विविध विधाओं का उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नाट्य चेतना का विकास करना तथा उन्हें रंगमंच की व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक समझ से समृद्ध करना था।

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कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित किया गया। कार्यशाला के दूसरे दिन के प्रथम सत्र में “कहानी और रंगमंच” विषय पर कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं प्रशिक्षक कुंदन कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने रंगमंच और साहित्य के गहरे संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कहानी केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मंच पर जीवन्त होकर समाज से संवाद स्थापित करती है।प्रकृति से जुड़ाव, विचारों पर संयम, कहानियों का संचार, ऑब्जर्व, एब्जॉर्ब एंड परफॉर्म इत्यादि। अभ्यास के माध्यम से अभिनेता की तैयारी कैसी होनी चाहिए। तदुपरांत कार्यशाला के दूसरे सत्र में मुंशी प्रेमचन्द लिखित दो कहानियां सद्गति एवं कफ़न को प्रस्तुति के लिए चयनित किया गया। चयनित दोनों कहानियों को एक साथ जोड़कर नाट्य प्रस्तुति प्रतिभागियों द्वारा तैयार की जाएगी, जिसका नाम *कफ़न की सद्गति* निर्धारित हुआ। यह सत्र विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों द्वारा विश्व प्रसिद्ध यूनानी नाटककार साफोक्लीज़ की कालजयी त्रासदी “एंटीगनी” का मंचन प्रस्तुत किया गया। नाटक में नैतिकता, मानवीय कर्तव्य, पारिवारिक दायित्व, सत्ता और न्याय के मध्य संघर्ष को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, भावपूर्ण संवाद अदायगी तथा प्रभावी मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। नाटक का प्रत्येक दृश्य दर्शकों को चिंतन के लिए प्रेरित करता रहा तथा प्रस्तुति को भरपूर सराहना प्राप्त हुई।

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इस नाट्य प्रस्तुति में चक्रपाणि पाण्डेय, जीशान फ़ज़ल, अमन कुमार, मो ग़ालिब, मनीष कुमार, हरिश्चन्द्र कुमार, कृष्णा कुमार, पूजा कुमारी, पिंकी कुमारी, मृत्युंजय कुमार पटेल, विकेश साह, राहुल कुमार, सोनाली कर्ण, रशून कुमार, केशव राज, पिंटू कुमार एवं मृत्युंजय शर्मा ने विभिन्न भूमिकाओं का सफल निर्वहन किया। सभी कलाकारों ने अपने पात्रों को जीवन्त बनाकर दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया तथा अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों की अभिनय क्षमता, मंचीय आत्मविश्वास और संवाद प्रस्तुति ने यह सिद्ध किया कि वे रंगमंच की गंभीर साधना के प्रति समर्पित हैं।

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कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं कला-प्रेमी दर्शकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। उपस्थित जनों ने संगोष्ठी और नाट्य प्रस्तुति दोनों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की तथा इसे विभाग की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय, मंच सज्जा, वेशभूषा और प्रस्तुति की गुणवत्ता की सराहना करते हुए तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ ने कहा कि संगीत एवं नाट्य विभाग विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर ऐसे रचनात्मक और शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा। उन्होंने प्रशिक्षक कुंदन कुमार, सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों तथा आयोजन में सहयोग देने वाले शिक्षकों और कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह आयोजन विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करने में सफल रहा, कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को अभिव्यक्त करने का एक सशक्त साधन है।

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