जिला पदाधिकारी श्री कौशल कुमार के आदेशानुसार,ज्ञान भारतम मिशन अंतर्गत पाण्डुलिपि सर्वे के तहत आज अंदामा मठ का सर्वेक्षण जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी,दरभंगा चंदन कुमार, नालंदा महाविहार से आए सहायक प्राध्यापक नैयंसी तथा सहायक प्राध्यापक लवकुश के द्वारा किया गया।
सर्वेक्षण के क्रम में अंदामा मठ के चौथी पीढ़ी के सुशील कुमार सिंह, साहब’, 5वीं पीढ़ी के मदन कुमार सिंह एवं राम नरेश राय, ‘साधु’, राजीव कुमार एवं अन्य मठों से आए कबीर पंथ के साधुगणों की उपस्थिति देखी गयी।
मठ के संरक्षण में उपलब्ध हस्तलिखित ग्रंथ कबीरवाणी के रूप में वर्ष 1905 में संकलित की गयी थी।
इन ग्रंथों में कबीर परंपरा से जीवन निर्वहण किये जाने का संदेश एवं समाज कल्याण का विचार पाया गया।
पाण्डुलिपि सर्वेक्षण का कार्य पुरे भारत में अंतिम चरण पर है जिसके बाद पाण्डुलिपियों के डिजिटाईजेशन एवं संरक्षण का कार्य किया जायेगा।
उपलब्ध ग्रंथों के ऊपर भारत के अलग-अलग विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों के द्वारा शोघ के कार्य किये जा चूके हैं जिनमें से पूर्णंदु रंजन के द्वारा 1998 में “कबीरपंथ इन मिथिला” शीर्षक के विशिष्ट विषय पर जमा की गयी पी.एच.डी. प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त श्री राजीव कुमार ने भी अलग-अलग मठों के ऊपर एक निबंध लिखा है। इन ग्रंथों का प्रभाव इस रूप में भी देखा जा सकता है कि इनसे प्रभावित होकर अमेरिकी अभियंता विलियम सीजर स्नेकी ने वैराग्य ग्रहण कर अपना सम्पूर्ण जीवन “केसरी दास” के नाम से 1982 तक नौला मठ में जिया।
जिला प्रशासन, दरभंगा समस्त जिलावासियों से अपील करता है कि पाण्डुलिपि से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी को ज्ञान भारतम मिशन पोर्टल पर उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएंगे।




