कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रंजन कुमार, संध्या देवी, डॉ. राकेश रंजन, गौतम कुमार वात्स्यायन, अमरेन्द्र कुमार अमर, संतोष कुमार और पियूष कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. प्रमोद कुमार यादव, डॉ. वकील राय, अभिमन्यु कुमार, मिथलेश कुमार, पुलिस कुमार, डॉ. अमन राज, राजेश पाल मीणा, राहुल श्रीवास्तव, राहुल कुमार, धीरज कुमार सिंह और सुनीता कुमारी मंच की शोभा बढ़ाते नजर आए।
कार्यक्रम का आकर्षक संचालन मुस्कान केशरी एवं सुजाता शर्मा ने किया, जिसकी शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद आयोजित काव्यगोष्ठी में सुमन लता, वंदना कुमारी, विवेक कुमार, सचिन शून्य, सुचिका श्रीवास्तव, चंदन कुमार, आस्था कुमारी, डॉ. ऋचा शर्मा श्रेष्ठा, सीताराम बुरट, रीति झा, डॉ. रामचन्द्र स्वामी, कल्याणी स्वरूपा, रंजना पाण्डेय मुक्ता, रमेश कुमार रसिय्यार, गुरुदीन वर्मा, श्वेता मौर्य, डॉ. भवानी शारदे, डॉ. शीतल शिवानी, अंजु कुमारी, डॉ. प्रियंका झा, शिल्पा श्रीवास्तव, डॉ. मनीष कुमार शशि, नंदलाल मणि त्रिपाठी, धर्मेंद्र सोलंकी, अभिषेक कुमार, दीपा श्रीवास्तव, आनन्द कुमार मित्तल, रियाज खान गौहर, चंद्रमोहन नीले, डॉ. शारदा प्रसाद दुबे, डॉ. योगिता सिंह हंसा, डॉ. पंकज कुमार बर्मन, बलराम यादव देवरा, ज्योति राज मधुरिमा, भारत भूषण वर्मा असंध और ममता मदान सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर सभी आमंत्रित साहित्यकारों को सम्मान पत्र, मोमेंटो, अंगवस्त्र एवं पत्रिका भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बिहार की समृद्ध सभ्यता, संस्कृति और साहित्यिक परंपरा को प्रोत्साहित करना रहा।
संस्थापिका मुस्कान केशरी ने अपने संबोधन में कहा,
“हमारा प्रयास है कि देशभर के साहित्यकारों को एक ऐसा मंच मिले, जहां वे अपनी रचनात्मकता को खुलकर अभिव्यक्त कर सकें। ऐसे आयोजन साहित्य को नई ऊर्जा देते हैं और नए रचनाकारों को पहचान दिलाते हैं।”
वहीं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा ने कहा,
“मुजफ्फरपुर में इस तरह के आयोजन न केवल साहित्यिक प्रतिभाओं को निखारते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच के प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह पहल वास्तव में सराहनीय है।
गौरतलब है कि एम एस केशरी पब्लिकेशन द्वारा एकल एवं साझा संकलन पुस्तकों का प्रकाशन किया जाता है। साथ ही हर माह दो दिवसीय काव्यगोष्ठी, जुगलबंदी, साक्षात्कार तथा कविता व वीडियो प्रतियोगिताओं का आयोजन कर देशभर के साहित्यकारों को सशक्त मंच प्रदान किया जा रहा है।
सचमुच, यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि साहित्य की जीवंत धड़कन का उत्सव बनकर उभरा।





