सहरसा सदर अस्पताल में लापरवाही का संगीन मामला, इलाज के दौरान महिला की मौत, अस्पताल के रजिस्टर में नहीं मिला नाम।
सहरसा सदर अस्पताल में लापरवाही का संगीन मामला, इलाज के दौरान महिला की मौत।
सहरसा से आज एक चौंकाने वाला और चिंता जनक मामला सामने आया है। सदर अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत हो जाती है, लेकिन अस्पताल के रजिस्टर में उसकी भर्ती का कोई रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है। यह मामला न सिर्फ अस्पताल की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई भी उजागर करता है।
मृतका की पहचान परमिला देवी के रूप में हुई है, जो मैना महिषी की रहने वाली थीं। परिजनों के अनुसार, 6 अक्टूबर को परमिला देवी को सांस की तकलीफ के चलते सदर हॉस्पिटल सहरसा में भर्ती कराया गया था। पहले उन्हें इमरजेंसी वार्ड में देखा गया और फिर वार्ड में शिफ्ट किया गया। इलाज के दौरान आज सुबह उनकी मौत हो गई।
मगर हैरानी की बात यह है कि अस्पताल के रिकॉर्ड रूम और रजिस्टर में परमिला देवी का नाम तक दर्ज नहीं है। यानी महिला भर्ती भी हुई, इलाज भी चला, मौत भी हो गई — लेकिन कागज़ात में जैसे वो मौजूद ही नहीं थीं।
इस गंभीर लापरवाही से नाराज़ परिजनों ने अस्पताल परिसर में जबरदस्त हंगामा किया। उनका आरोप है कि डॉक्टरों की गलत दवा और लापरवाही के कारण परमिला देवी की मौत हुई है। उन्होंने सिविल सर्जन को लिखित आवेदन देकर डॉक्टरों पर हत्या का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
परिजनों ने कहा,“हमारी मां को गलत इंजेक्शन लगाया गया, हालत बिगड़ी तो कोई डॉक्टर देखने तक नहीं आया। अब अस्पताल कह रहा है कि उनका कोई रिकॉर्ड नहीं है यह तो सरासर अपराध है!”
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन सहरसा ने कहा है कि “जांच टीम गठित की जा रही है, जो पूरे मामले की तहकीकात करेगी। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है, सदर अस्पताल में कागज़ी इलाज और असली लापरवाही की कहानियां आम हो चुकी हैं।अब देखना यह है कि क्या इस बार प्रशासन वाकई जिम्मेदारों तक पहुंचेगा, या एक और मौत सरकारी फाइलों में “प्रक्रिया जारी है” बनकर रह जाएगी।
