‘मां काली का आशीर्वाद लेने गए थे, लाश बनकर लौटे
एक तीन बहनों में इकलौता भाई था, दूसरा 100 बच्चों का चहेता था; विसर्जन में डूबे दोनों।
‘मेरा बेटा बिहार पुलिस में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था। काफी मेहनत से उसे पढ़ाया था, बीए पास करने के बाद अपने घर पर कोचिंग खोला। सुबह-शाम बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ वह अपने नौकरी की तैयारी करता था। खेती-किसानी में भी मेरा साथ देता था। पता नहीं कैसे क्या हो गया की मां काली की प्रतिमा विसर्जन के समय बेटा हमको छोड़कर दुनिया से चला गया।’
ये बातें मंसूरचक थाना क्षेत्र के वीरगंज गांव के रहने वाले दिनेश कुमार महतो ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कही। दिनेश कुमार महतो के 20 साल के बेटे राहुल कुमार की शुक्रवार की शाम बलान नदी में डूब कर मौत हो गई। दरअसल, मंसूरचक के महेंद्रगंज में दुर्गा पूजा के समय वर्षों से मां काली की प्रतिमा स्थापित की जाती है। नवरात्रि के प्रथम दिन से विधि विधान के साथ काली पूजा शुरू होता है।
विजयादशमी के दिन कलश और प्रतिमा विसर्जन हो जाता है। इस वर्ष विजयादशमी गुरुवार को था, जिसके कारण प्रतिमा का विसर्जन शुक्रवार को किया गया। लोग दोपहर में विसर्जन के लिए प्रतिमा लेकर चले तो महेंद्रगंज के साथ बगल के गांव वीरगंज के भी दर्जनों युवक हर साल की तरह विसर्जन में साथ दे रहे है ।
घटनास्थल पर जुटी लोगों की भीड़।
मां दुर्गा की मूर्ति को विसर्जित करने 25 लड़के नदी में उतरे, राहुल के साथ विपिन नहीं लौटा
गांव में घूमने के बाद मां दुर्गा की मूर्ति महेंद्रगंज के बगल से ही गुजर रहे बलान नदी के घाट पर पहुंची। वहां 20-25 युवक प्रतिमा को लेकर बीच नदी में विसर्जन के लिए चले। विसर्जन के बाद सभी लोग वापस आ गए, लेकिन दिनेश कुमार महतो का बेटा राहुल कुमार और शिव शंकर महतो का करीब 18 साल का बेटा विपिन कुमार उर्फ बिट्टू वापस नहीं लौटा।
बाहर निकलने पर लोगों ने जब दोनों की खोजबीन की तो लापता मिला। जिसके बाद स्थानीय युवा नदी में कूद पड़े और तलाश शुरू की गई तो बेहोशी की हालत में दोनों को बाहर निकाला गया। डूबने की खबर सुनते ही गांव में हल्ला मच गया तो दिनेश महतो एवं शिव शंकर महतो भी परिवार के साथ दौड़े-भागे नदी किनारे पहुंचे। तब तक दोनों युवकों को उठाकर मंसूरचक पीएचसी भेज दिया गया था।
परिजन पीएचसी पहुंचे, जहां दोनों की स्थिति नाजुक थी तो पुलिस दोनों को लेकर बेगूसराय गई, जहां मृत घोषित कर दिया गया। रात में ही पोस्टमार्टम के बाद लाश गांव पहुंची और दोनों का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। राहुल का अंतिम संस्कार सिमरिया घाट में किया गया, जहां चाचा गणेश महतो ने मुखाग्नि दी। जबकि बिट्टू का अंतिम संस्कार झमटिया घाट में किया गया, चाचा हरेराम महतो ने मुखाग्नि दी।
गांव में पहली बार विसर्जन के दौरान दो लड़कों की मौत
दोनों युवकों का अंतिम संस्कार भले ही हो गया, लेकिन राहुल और बिट्टू दोनों इतने मिलनसार स्वभाव के थे की हर कोई हैरान है। परिजन और मेला कमेटी के लोग कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं। पहली बार ऐसा हुआ है जब विसर्जन के दौरान उनके गांव में एक साथ दो युवकों की मौत हुई है। मेला कमेटी के कोषाध्यक्ष शंभू पंडित कहते हैं कि हम लोग विसर्जन के लिए नदी किनारे पहुंचे। वहां पूजा पाठ करने के बाद 20-25 लड़का विसर्जन के लिए नदी में गए।
10 मिनट के बाद जब निकले तो जानकारी मिली कि राहुल और विपिन उर्फ बिट्टू डूब गया है। ऐसा कभी नहीं होता था पता नहीं कहां से क्या चूक हुई। विसर्जन में शामिल एक प्रत्यक्षदर्शी युवक का कहना है कि हम सभी लोग विसर्जन करने पानी में गए। तभी मूर्ति का वजन अधिक रहने के कारण दोनों डूब गए। खोजबीन करने पर काफी प्रयास के बाद हम सबने दोनों को बाहर निकाला।
मृतक के घर के बाहर ग्रामीणों की भीड़।
घटनास्थल से दोनों मृतकों के घर की दूरी मात्र 300 मीटर
मृतक दोनों युवकों के घर की दूरी मुश्किल से 300 मीटर दूर होगी। विपिन कुमार उर्फ बिट्टू, शिव शंकर महतो का इकलौता बेटा था। तीन बहन का इकलौता भाई बिट्टू सभी का चहेता था। पिता गांव में ही खेती किसानी करते हैं। अपने बेटे को उन्होंने काफी मेहनत से पढ़ाया। अभी बीए पार्ट-2 का वह स्टूडेंट पढ़ाई एवं अपने पिता की खेती में मदद करने के साथ-साथ गांव में सामाजिक कार्यों में भी काफी सक्रिय रहा करता था।
बिहार पुलिस की तैयारी में उसका लगन देखकर परिवार और गांव के लोग सोचते थे कि एक न एक दिन नाम रोशन करेगा। लेकिन उसकी अचानक हुई मौत से परिवार और समाज के लोग स्तब्ध हैं। बहन मीणा, रिंकू और छोटी का रो-रो कर बुरा हाल है। शिवशंकर महतो शुक्रवार की रात घटना के बाद से बिछावन पर गिरे तो फिर उठने की हिम्मत नहीं है। शिव शंकर महतो का कहना था कि सूचना मिली तो हम दौड़ कर पहुंचे, लेकिन बेटा बच नहीं सका।
बीए पास करने के बाद घर पर ही कोचिंग चलाता था राहुल
दूसरा युवक राहुल कुमार दिनेश महतो के तीन बेटे में दूसरे नंबर पर था। बीए पास करने के बाद वह अपने घर पर ही कोचिंग चलाता था। जिसमें करीब 100 बच्चे पढ़ने आते थे। बच्चों को वह पूरे मन से पढ़ता था तो दिन में अपने पिता के साथ खेत में भी काम करता था उसकी इच्छा बिहार पुलिस में जाने की थी, जिसके कारण वह गांव में ही एक्सरसाइज करता था।
फिलहाल दो युवकों की असामयिक मौत से माहौल पूरी तरह गमगीन है। परिवार के लोग जवान बेटा की मौत से बदहवास हैं तो वहीं गांव के लोग भी कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं। मेला समिति भी समझ नहीं पा रही है कि देखते ही देखते क्या हो गया है।
