सनातन धर्म में साल के 16 दिन पूर्वजों को समर्पित माने जाते हैं। जिन्हें पितृ पक्ष, श्राद्ध पक्ष या महलया कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इसे कनागत भी कहते हैं, क्योंकि इस समय सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं। इस साल पितृ पक्ष 7 सितंबर, रविवार से शुरू होकर 21 सितंबर तक मनाया जाएगा। अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या होगी।
पितृपक्ष की शुरुआत के साथ ही दरभंगा के तालाब में सामूहिक तर्पण पर लोग उमड़े है। घाट और साफ-सफाई की कमी से ग्रामीण परेशान है।
पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष का आरंभ भाद्रपद पूर्णिमा से होता है। इस बार पूर्णिमा श्राद्ध 7 सितंबर को रहेगा, लेकिन इस दिन दोपहर 12:57 बजे से चंद्रग्रहण का सूतक लग जाने के कारण श्राद्धकर्म दोपहर पूर्व ही करना आवश्यक है।
पौराणिक मान्यता है कि पितृपक्ष में हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध ग्रहण करते हैं। माना जाता है कि पितृ श्रद्धा और जल के भूखे होते हैं। इसलिए निष्ठापूर्वक किया गया अर्पण वंशजों को सुख-समृद्धि और मंगल का आशीर्वाद दिलाता है।
इन दिनों तामसिक आहार, मांस-मदिरा, प्याज-लहसुन का सेवन, विवाद और क्रोध से बचना चाहिए। हर रोज स्नान के बाद दक्षिणमुख होकर जल अर्पण करने की परंपरा बताई गई है।
11 सितंबर को सूर्योदय से दोपहर 12:45 बजे तक चतुर्थी तिथि रहेगी, जिसके बाद पंचमी तिथि शुरू होकर अगले दिन 12 सितंबर सुबह 9:58 बजे तक रहेगी। शास्त्रीय नियम के अनुसार श्राद्ध केवल मध्यान्ह काल में ही किया जाता है। इसलिए चतुर्थी और पंचमी दोनों श्राद्ध 11 सितंबर को ही संपन्न होंगे।
तालाब में सामूहिक रूप से तर्पण
स्थानीय लोगों ने बताया कि पितृपक्ष के अवसर पर प्रतिदिन गांव के तालाब में सामूहिक रूप से तर्पण किया जाता है।श्रद्धालु अपने-अपने पितरों के नाम-गोत्र से जल अर्पण,पिंडदान और तर्पण करते हैं।
गांव के रौशन मिश्रा ने कहा कि“हर साल की तरह इस बार भी तालाब में आकर तर्पण किया। आज ऋषि तर्पण था, कल से पत्र तर्पण शुरू होगा। पितरों को जल देना हमारा कर्तव्य है, इससे आत्मा को सुकून मिलता है। लेकिन इस बार तालाब में गंदगी बहुत ज्यादा है और पानी भी कम है। प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इसकी सफाई करवानी चाहिए। साथ ही घाट का निर्माण भी जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके।”
ग्रामीण वरुण चौधरी ने भी नाराजगी जताई।उन्होंने कहा कि “तालाब की हालत बहुत खराब है।दो महीने बाद छठ पूजा आने वाली है,लेकिन अब तक घाट का निर्माण नहीं हुआ। तालाब में पानी भी कम है और गंदगी भरी पड़ी है।15 दिन तक लोग यहीं स्नान और तर्पण करेंगे,ऐसे में साफ-सफाई और घाट की व्यवस्था जरूरी है।छठ से पहले घाट का निर्माण प्रशासन को कराना ही चाहिए।”
1. इस दौरान विवाह, गृहप्रवेश जैसे किसी भी शुभ कार्य का आयोजन नहीं होता।
2. मांस-मदिरा और तामसिक भोजन वर्जित है।
3. ब्राह्मण भोजन व दक्षिणा देने के बाद गाय, कुत्ते और कौवे को अन्न अर्पित करने की परंपरा है।
श्राद्ध तिथियों का क्रम
7 सितंबर – पूर्णिमा श्राद्ध (सूतक पूर्व)
8 सितंबर – प्रतिपदा
9 सितंबर – द्वितीया
10 सितंबर – तृतीया
11 सितंबर – चतुर्थी व पंचमी
12 सितंबर – षष्ठी
13 सितंबर – सप्तमी
14 सितंबर – अष्टमी
15 सितंबर – नवमी
16 सितंबर – दशमी
17 सितंबर – एकादशी
18 सितंबर – द्वादशी
19 सितंबर – त्रयोदशी
20 सितंबर – चतुर्दशी
21 सितंबर – सर्वपितृ अमावस्या
पितृपक्ष का यह पावन पर्व पूर्वजों की स्मृति और उनके आशीर्वाद का प्रतीक है। श्रद्धालु पूरे समर्पण के साथ तर्पण और पिंडदान कर रहे हैं, लेकिन तालाब की दुर्दशा और घाट निर्माण न होने से ग्रामीणों में रोष भी है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि जल्द से जल्द साफ-सफाई और घाट निर्माण का काम कराएं, ताकि श्रद्धालुओं को सुविधा हो और आगामी छठ पूजा भी सुचारू रूप से संपन्न हो सके।




