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बिहार तक पहुंची पंजाब बाढ़ की मार, मधुबनी के प्रवासी मजदूरों पर मंडरा रहा रोजी-रोटी का संकट।

पंजाब में आई भीषण बाढ़ का असर अब बिहार के मजदूरों पर भी दिख रहा है. मधुबनी और सहरसा समेत कई जिलों के सैकड़ों प्रवासी श्रमिक, जो हर साल पंजाब जाकर धान की बोआई और कटाई से अपना गुजारा करते थे, अब रोजगार संकट से जूझ रहे हैं. खेत-खलिहान डूब जाने से उनका काम बंद हो गया है, कई लोग पंजाब में ही फंसे हुए हैं और घरवाले उनकी सलामती को लेकर चिंतित हैं.

पंजाब में आई भीषण बाढ़ ने वहां के लोगों का तो सब कुछ छीन ही लिया है, लेकिन इसकी टीस अब बिहार में भी दिखने लगी है. मधुबनी और सहरसा जैसे जिलों के सैकड़ों प्रवासी मजदूर, जो पंजाब के खेतों में मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते थे, अब रोजगार संकट से जूझ रहे हैं.

मधुबनी में चिंता का माहौल

मधुबनी के सैकड़ों श्रमिक हर साल पंजाब के खेतों में धान बोआई और कटाई करने जाते हैं. यही खेत-खलिहान उनके घर-परिवार की खुशियों का सहारा होते थे. लेकिन इस बार बाढ़ में डूबे खेतों ने मजदूरों की उम्मीदें तोड़ दी हैं. मजदूरी बंद होने से परिवारों में आर्थिक संकट गहराने लगा है. जिन श्रमिकों के परिजन पंजाब में फंसे हैं, उनकी सलामती को लेकर भी घरवालों की चिंता बढ़ गई है ।

सहरसा जंक्शन पर ट्रेन पकड़ने आए अरविंद कुमार ने बताया कि वह पिछले एक दशक से पंजाब में मजदूरी कर रहे थे. इस बार भी धान लगाया था, लेकिन बाढ़ आने से कटाई नहीं हो पाई. मजबूरी में अब उन्हें हरियाणा जाना पड़ रहा है.

सहरसा जिले के महिषी निवासी अर्जुन, जो अमृतसर में काम करते थे, भी अब हरियाणा की राह पकड़ रहे हैं. उनका कहना है कि कई साथी अभी भी पंजाब में फंसे हैं और बिजली संकट के कारण उनका संपर्क नहीं हो पा रहा.

अशोक राम और साहेब जैसे मजदूर भी हर साल पंजाब जाकर धान की रोपाई और कटाई कर अपना जीवन चलाते थे. लेकिन बाढ़ ने उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है. अब वे भी दिल्ली और हरियाणा की ओर रुख कर रहे हैं.

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