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समस्तीपुर में गंगा खतरे के निशान से पार:दियारा क्षेत्र से लोगों का पलायन जारी; 35 से ज्यादा गांव डूबे, सड़क पर चार फीट तक पानी।

समस्तीपुर जिले में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुकी है। मोहनपुर और मोहिउद्ददीन नगर में करीब 35 गांव में बाढ़ का पानी घुसा है। विद्यापति नगर में बाया नदी भी उफान पर है। दियारा क्षेत्र से लोगों का पलायन जारी है। बाढ़ पीड़ितों ने विद्यापति नगर हाई स्कूल मैदान में पशुओं के साथ डेरा जमा दिया है, जबकि कुछ लोग चिनगिया बांध पर अपने खुले आसमान के नीचे परिवार के साथ रह रहे हैं। हालांकि अभी तक राहत कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

मोहनपुर प्रखंड स्थित विशनपुर बेरी पंचायत के कृष्ण कुमार झा ने बताया कि चापर, मठियोर, पतसिया, रामगोलवा के लोग बेरी हनुमान मंदिर के पास जमे हुए हैं। इस इलाके में करीब 10 हजार की आबादी प्रभावित है। नाव एक दो ही है। जिससे लोगों को दिक्कत हो रही है। गांव जाने वाली मार्ग पर चार फीट तक पानी है।

गांव में सड़क पर चार फीट तक पानी।

सरकारी स्तर पर सुविधा नहीं

मोहिउद्ददीन नगर के हरैल पंचायत के नागेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि इलाके में पूरा पानी लगा है। बांध के दक्षिण तीनों सड़क डूब गई है। इस पंचायत में 15 हजार की आबादी प्रभावित है। इलाके में तीन नाव मिला है। जिससे लोग आना जाना कर रहे हैं।

चापार गांव के विनय कुमार सिंह ने बताया कि इस पंचायत के चार वार्ड में पानी है। आने जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं की गई है। दो नाव मिला है, लेकिन लोग केला का थंब से नाव बनाकर इस्तेमाल कर रहे हैं।

मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाते हुए ग्रामीण।

विद्यापतिनगर में बाया बरपा रही है कहर

विद्यापतिनगर के चार पंचायत के 12 वार्डों के लोग बाढ़ की चपेट में हैं। बाया के जलस्तर में वृद्धि जारी है। जिससे बाढ़ क्षेत्र से लोगों को पलायन जारी है। करीब 200 पशुओं के साथ बाढ़ पीड़ित स्कूल कैंपस में पशुओं के साथ जमा हो गए हैं। इस कैंप में भी अभी राहत कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

पीएचईडी विभाग कैंपों में लगा रहा चापाकल

उधर, बाढ़ प्रभावित इलाकों में पेयजल का संकट है। इसके लिए टैंक से पानी पहुंचाया गया है। जहां चापाकल नहीं है। वहां पर चापाकल लगाया जा रहा है। पानी को शुद्व् करने तरीका भी अपनाया जा रहा है। पीएचईडी के जेई सुशांत शर्मा ने बताया कि सात टैंकरो के माध्य से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही जरूरत के हिसाब से चापाकल भी लगाया जा रहा है।

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