बिहार की महिला थाना प्रभारी की बड़ी पहल, पैड वूमेन के रूप में बनायी पहचान।
पटना:बिहार के पटना जिले के स्लम बस्ती में जाकर महिलाओं को माहवारी और स्वच्छता के प्रति महिला थाना प्रभारी खुशबू खातून (40 वर्ष) जागरुक कर रही हैं. इतना ही नहीं अपनी सैलरी के पैसों से अब तक 10 महादलित बस्ती में जाकर तकरीबन 1500 महिलाओं को सेनेटरी पैड बांट चुकी हैं. विस्तार से जानें मसौढ़ी अनुमंडल स्थित लहसुना थाने की प्रभारी की कहानी.
बिहार कीथाना प्रभारी बनी पैड वूमेन:राजधानी पटना से सटे मसौढ़ी अनुमंडल के लहसुना थाने की थाना प्रभारी खुशबू समाज के कल्याण के लिए तत्पर हैं. थाने में बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने वाली खुशबू महिला होने के नाते भी अपने दायित्वों को निभा रही हैं. इन दिनों उनकी पैड वूमेन के रूप में भी पहचान बन गई हैं. खुशबू महिलाओं को जागरुक करते हुए गंदे कपड़े के इस्तेमाल से बचने की सलाह देते हुए इसके दुष्प्रभावों से सभी को अवगत भी कराती हैं.
“आज भी हमारे समाज में दबे कुचले खासकर स्लम बस्ती की महिलाओं में अज्ञानता है. जागरूकता नहीं है. महावारी को लेकर आज भी महिलाओं में शर्म और संकोच है. सब कुछ बताने में हिचकिचाती हैं. इसको लेकर हमने मन में ठाना कि वैसे लोगों के बीच जाकर उन्हें जागरूक करेंगे.”– खुशबू खातून, थाना प्रभारी, लहसुना थाना
महावारी के प्रति कर रहीं महिलाओं को जागरुक: दरअसल स्लम बस्तियों में जाकर महिलाओं और किशोरियों के बीच उन्हें माहवारी के प्रति खुशूबू जागरूक कर रही हैं. न केवल उन सभी महिलाओं को जागरुक कर रही है बल्कि उन्हें सैनिटरी पैड भी दे रही हैं. ईटीवी भारत की टीम से थाना प्रभारी खुशबू खातून ने बातचीत में बताया कि पुलिस की सेवा में काफी व्यस्तता होती है, लेकिन जब कभी भी वक्त मिलता है तो महादलित टोलों में स्लम बस्तियों में जाकर हम उन सभी महिलाओं को किशोरियों को स्वच्छता के रति उन्हें जागरुक करते हैं.
“पुलिस वाली मैडम हमारे गांव में आई थी और हमें पैड देकर गई हैं. बहुत कुछ बताई हैं जो हम सभी लोग नहीं जानते थे, अच्छा लगा.”-सोनी कुमारी, स्थानीय, बांसडीह मुसहरी
10 महादलित बस्तियों में पैड का वितरण: खुशबू कहती हैं कि मैं भी एक महिला हूं, इसीलिए इस बात को बेहतर ढंग से समझती हूं. लहसुना थाना क्षेत्र के अंतर्गत बांसडीह मुसहरी काफी बड़ा है. तकरीबन 500 से ज्यादा आबादी है. काफी संख्या में यहां महिलाएं किशोरियां रहती हैं. उन सबों के बीच सेनेटरी पैड का भी वितरण कर रहे हैं. अब तक 10 स्लम बस्तियों में जाकर 1500 से अधिक महिलाओं किशोरियों के बीच पैड का वितरण कर चुकी हूं.
‘कई महिलाएं शरमा कर चली गईं’:थाना प्रभारी खुशबू का कहना है कि इन सबों के लिए कोई सरकारी मदद या किसी संस्था का सहारा मैंने नहीं लिया है. मैं खुद अपनी सैलरी के पैसों से महिलाओं और किशोरियों को सेनेटरी पैड मुहैया करवाती हूं. इस काम में हमें काफी अच्छा लगता है. मुसहरी में महिलाओं के बीच सेनेटरी पैड लेकर पहुंचे तो कई महिलाएं शरमा कर चली गई और पैड लेने नहीं आई, लेकिन अपने बच्चों को पैड लेने के लिए भेज दिया.
“जब भी हमें वक्त मिलता है तो आसपास के मुसहरी, स्लम बस्ती के इलाके में जाकर उन सभी महिलाओं के बीच स्वच्छता के प्रति उन्हें जागरुक करती हूं. सेनेटरी पैड का वितरण करती हूं और उन्हें माहवारी के प्रति जागरुक करती हूं. कई किशोरियों महिलाओं को हमने जागरूक किया है और यह हमें अच्छा लगता है.”-खुशबू खातून, थाना प्रभारी, लहसुना थाना
समय निकालकर जाती हैं स्लम बस्ती: खुशबू ने महिलाओं खासकर किशोरियों को जागरुक करते हुए कहा कि माहवारी के दिनों में गंदे कपड़े का इस्तेमाल नहीं करना है. खुशबू ने कहा कि मैं सभी को चीजों के बारे में खुलकर इन लोगों से बात करती हूं. बहरहाल लहसुना थाने की थाना प्रभारी खुशबू खातून इन दिनों अपने इलाके में पैड वूमेन के रूप में भी चर्चा में हैं. एक थाना प्रभारी जो अपने व्यस्तता भरे वक्त में भी स्लम इलाके के गलियों में घूम-घूम कर लोगों को जागरुक कर रही हैं और स्वच्छता की खुशबू लोगों में बिखेर रही हैं.
“हमारे घर में बताने वाला कोई नहीं था. हमारे माता-पिता, सास ससुर मर गए हैं. किसी तरह से कपड़ा का ही प्रयोग करते थे, लेकिन अब धीरे-धीरे समझ में आ रहा है की वास्तविकता क्या है. स्वच्छता क्या है. थाना प्रभारी को हम धन्यवाद देते हैं.”– कविता देवी, स्थानीय, बांसडीह मुसहरी
“सुनकर बहुत ही अच्छा लगा. एक सामाजिक पहल जरूरी है. लहसुना थाना के महिला थाना प्रभारी खुशबू खातून को मैं दिल से धन्यवाद देता हूं कि वह बहुत ही अच्छा काम कर रही हैं. आज भी महादलित टोलों में महिलाओं के बीच काफी अज्ञानता है. उन्हें जागरूक करना बेहद जरूरी है.“- कुमारी खुशबूरानी, सोशल एक्टिविस्ट, मसौढ़ी
कपड़ा क्यों नहीं करना चाहिए इस्तेमाल: आमतौर पर कई केस देखे जाते हैं जिनमें महिलाएं पुराने गंदे कपड़े को इस्तेमाल करती हैं. लंबे समय तक ऐसा करने से वेजाइनल इंफेक्शन का खतरा रहता है. कपड़े में सोखने की क्षमता कम होती है. एक ही कपड़े को कई बार यूज करने से वेजाइना संबंधित कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. साथ ही साथ कपड़ा महिलाओं को सुविधाजनक नहीं लगता है.
कौन हैं खुशबू खातून:खुशबू खातून अक्सर समाज में जागरुकता लाने के लिए काम करती हैं. बच्चों को भी निशुल्क पढ़ाती हैं. 2018 बैच की थाना प्रभारी खुशबू खातून ने आज अपनी अलग पहचान बना ली है. खुशबू खातून के पिता का नाम मोहम्मद शाहिद है, जो पेशे से एक किसान हैं. खुशबू खातून तीन बहन दो भाई हैं. तीनों बहन में एक पुलिस में एक टीचर है तो एक और सरकारी सेवा में है.
