इस परियोजना के तहत पश्चिमी कोसी मुख्य नहर के जीरो किलोमीटर से 35.13 किलोमीटर (नेपाल भाग) तक तथा भारतीय भाग में आवश्यकतानुसार पश्चिमी कोसी मुख्य नहर और इसकी वितरण प्रणालियों की लाइनिंग, क्रॉस ड्रेनेज संरचनाओं, गेट और क्षतिग्रस्त संरचनाओं के नवीकरण एवं आधुनिकीकरण कार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, नई संरचनाओं का निर्माण, नहरों के बांध पर सेवा पथ का निर्माण, तथा 58658 हेक्टेयर कृषि योग्य कमांड क्षेत्र के सृजन हेतु उपनाथ शाखा नहर, विदेश्वरस्थान शाखा नहर और काकरघाटी शाखा नहर का विस्तारीकरण कार्य भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भविष्य में इन नहरों में स्काडा प्रणाली (SCADA system) लगाने का भी प्रावधान किया गया है, जो जल वितरण को और अधिक कुशल बनाएगा।
परियोजना के क्रियान्वयन से दरभंगा जिले के अलीनगर, बहेड़ी, बिरौल, घनश्यामपुर, गौड़ा बौराम, हनुमान नगर, किरतपुर, कुशेश्वरस्थान, कुशेश्वरस्थान पूर्वी, हायाघाट, ताराडीह, मनीगाछी, केवटी, दरभंगा सदर, बेनीपुर एवं बहादुरपुर (कुल 16 प्रखंड) तथा मधुबनी जिले के खुटौना, घोघरडीहा, फुलपरास, बाबूबरही, अंधराठाढ़ी, झंझारपुर, मधेपुर, लखनौर, खजौली, लदनियां, लौकहा, राजननगर, पंडौल, कलुआही, रहिका, बेनीपट्टी, बिस्फी, बासोपट्टी, हरलाखी एवं मधुवापुर (कुल 20 प्रखंड) सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। यह योजना इन क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं को सुदृढ़ कर कृषि पर निर्भर आबादी के लिए जीवनरेखा साबित होगी।
इस योजना से कुल 215672 हेक्टेयर कृषि योग्य कमांड क्षेत्र (सी0सी0ए0) का विकास होगा, और इसकी कुल सिंचाई क्षमता बढ़कर 291158 हेक्टेयर हो जाएगी। विशेष रूप से, उपनाथ शाखा नहर, विदेश्वरस्थान शाखा नहर और काकरघाटी शाखा नहर के विस्तारीकरण से 58658 हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि योग्य कमांड क्षेत्र का सृजन होगा, जिससे किसानों को पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल द्वारा हस्ताक्षरित इस स्वीकृति पत्र में परियोजना को मार्च 2029 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह स्वीकृति तत्कालीन जल संसाधन मंत्री संजय झा के विजन और परिश्रम का ही परिणाम मानी जा रही है, जो मिथिलांचल के समग्र विकास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

 की महत्वाकांक्षी योजना को आखिरकार प्रशासनिक एवं व्यय की स्वीकृति मिल गई है। श्री झा के कार्यकाल में इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए इसके सभी पहलुओं पर गहन कार्य किया गया, जिसका सीधा लाभ अब मिथिलांचल के लाखों किसानों को मिलेगा और क्षेत्र में कृषि उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।</p><div class=)



