जिले में लगातार बढ़ रहे हैं टीबी के मरीज, जनवरी 2025 से अब तक 3565 मरीज चिह्नित किए गए।
मधुबनी टीबी कार्यक्रम को लेकर समीक्षा बैठक का आयोजन सदर अस्पताल में सीडीओ डॉ. जी. एम. ठाकुर की अध्यक्षता में की गई बैठक का उद्देश्य राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करना और इसके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना है। बैठक जिला स्तर पर आयोजित की गई जिसमें सभी प्रखंडों के एसटीएस, एसटीएलएस व सहयोगी संस्था के प्रतिनिधि शामिल रहे। बैठक में टीबी के मामलों की समीक्षा की गई जिसमें टीबी के नए मामलों की संख्या, उपचार की दर और उपचार के परिणामों की समीक्षा की गई।
साथ ही टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चल रही गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की गई जिसमें जागरूकता अभियान, स्क्रीनिंग और उपचार सेवाएं शामिल रही। बैठक के दौरान टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए रणनीतियों पर चर्चा की गई। साथ ही जिले के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) पर टीबी स्क्रीनिंग व बलगम संग्रह की सुविधा उपलब्ध है। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से सघन टीबी खोज अभियान की शुरुआत होगी।
सीडीओ ने बताया जिले में जनवरी 2025 से जून 2025 तक टीबी के 3565 मरीज चिह्नित हुए जिसमें प्राइवेट में 1658 सरकारी संस्थान में 1907 मरीज चिह्नित हुए। जून माह में टीबी के 243 मरीज चिह्नित हुए जिसमें प्राइवेट में 3 सरकारी संस्थान में 229 मरीज चिह्नित किए गए हैं। इसमें एमडीआर के 11 मरीजों की पहचान की गई है। एमडीआर के मरीजों का उपचार 9 माह से 2 साल तक चलता है। उन्होंने बताया राज्य के निर्देशानुसार प्रति 1000 पापुलेशन पर 30 लोगों का टीबी का स्क्रीनिंग करना है।
जिले के 16 प्रखंड में ट्रूनट मशीन से टीबी की जांच हो रही है। जिले में टीबी मरीजों की संख्या बढ़ने का मुख्य कारण यह भी है कि अधिकतर मरीज बीच में ही इलाज एवं नियमित रूप से दवा का सेवन करना छोड़ देते हैं। इसीलिए विभाग द्वारा निक्षय मित्र योजना की शुरूआत की गई है। इस योजना के तहत मरीजों को गोद लिया जाता है जिसके लिए सरकार और विभाग अपने स्तर से पूरी तरह से प्रयासरत है। लेकिन अब एक दूसरे को जागरूक होने की आवश्यकता है। एमडीआर मरीजों का उपचार 9 माह से दो साल तक चलता है।
